रांची : झारखंड में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज हुई है। वर्ष 2023 से मार्च 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों, गिरफ्तारियों और मादक पदार्थों की जब्ती में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसी अवधि में जिला स्तरीय नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की बैठकों में भी तेजी आई है, जिससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत हुआ है।
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झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में गांजा, अफीम, ब्राउन शुगर, हेरोइन और डोडा सहित विभिन्न प्रतिबंधित मादक पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत 412 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
2024 में सबसे अधिक कार्रवाई, रिकॉर्ड गिरफ्तारियां
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 नार्कोटिक्स के खिलाफ कार्रवाई के लिहाज से सबसे प्रभावी रहा। इस दौरान 803 मामले दर्ज किए गए और रिकॉर्ड 1,062 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस वर्ष करीब 195 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए। वर्ष 2023 में 529 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें 773 लोगों की गिरफ्तारी हुई और 112 करोड़ रुपये के ड्रग्स बरामद किए गए। वहीं 2025 में 782 मामले दर्ज कर 994 लोगों को गिरफ्तार किया गया तथा 85 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए। मार्च 2026 तक के शुरुआती तीन महीनों में 211 नए मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इस दौरान 320 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और लगभग 20 करोड़ रुपये के ड्रग्स बरामद किए गए।
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गांजा की सबसे अधिक जब्ती, NCORD बैठकों में बढ़ी सक्रियता
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में सर्वाधिक 6,617.76 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया। वर्ष 2023 से मार्च 2026 तक कुल मिलाकर 15,000 किलोग्राम से अधिक गांजा बरामद हुआ। इसके अलावा 2024 में 1,211.85 किलोग्राम अफीम तथा 2023 में रिकॉर्ड 51,404.73 किलोग्राम डोडा जब्त किया गया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में कफ सिरप, प्रतिबंधित टैबलेट, कैप्सूल, इंजेक्शन, कोडीन फॉस्फेट और मॉर्फिन भी बरामद किए गए।
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नशे के खिलाफ समन्वित कार्रवाई के लिए राज्य के 24 जिलों में NCORD बैठकों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2024 में 56 बैठकें आयोजित हुई थीं, जो 2025 में बढ़कर 155 पहुंच गईं। मार्च 2026 तक इस वर्ष 25 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। जिलावार आंकड़ों में खूंटी लगातार सक्रिय रहा, जहां 2024 में 10 और 2025 में 9 बैठकें हुईं। वहीं 2025 में लोहरदगा और गुमला में सबसे अधिक 12-12 बैठकें आयोजित की गईं। लातेहार में 11 बैठकें हुईं, जबकि जमशेदपुर और साहिबगंज जैसे कुछ जिलों में बैठकों की संख्या शून्य या बेहद कम दर्ज की गई।



