रांची : झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने गुरुवार को ‘अमृतलाल नागर : भारतीय धर्म और संस्कृति’ पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय धर्म और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को समझने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में ऐसे शोधपरक ग्रंथों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक प्रख्यात साहित्यकार एवं उपन्यासकार अमृतलाल नागर के कथा साहित्य के माध्यम से भारतीय धर्म, संस्कृति और जीवन मूल्यों का गंभीर और संतुलित अध्ययन प्रस्तुत करती है।
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राज्यपाल ने कहा कि अमृतलाल नागर का साहित्य भारतीय समाज, उसकी सांस्कृतिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सहिष्णुता, समन्वय की भावना और मानवीय दृष्टिकोण है। उन्हें प्रसन्नता है कि पुस्तक में इन मूल्यों का गंभीरता से उल्लेख किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी साबित होगी तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
आपातकाल के दिनों का किया उल्लेख
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने अपने जीवन का एक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें लगभग एक वर्ष तक कारागार में रहना पड़ा था। उस अवधि में उन्हें अनेक साहित्यिक पुस्तकों और उपन्यासों का अध्ययन करने का अवसर मिला।
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उन्होंने कहा कि उसी समय उन्होंने अमृतलाल नागर सहित कई साहित्यकारों की कृतियों का गहन अध्ययन किया। उनके अनुसार, हिंदी साहित्य की अपनी अलग पहचान और समृद्ध परंपरा है, जो भारतीय समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को गहराई से अभिव्यक्त करती है।
लेखिका को दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने पुस्तक की लेखिका डॉ. समीक्षा मिश्र को इस कृति के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा जताई कि यह पुस्तक भारतीय संस्कृति और साहित्य के अध्ययन में महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में अपनी पहचान बनाएगी।




