14वीं JPSC परीक्षा विवाद: पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने तोड़ी चुप्पी, CID जांच से लेकर एजेंसी चयन और अपनी भूमिका पर रखी बात, एजेंसी कल करेंगी पूछताछ

राँची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं और उसके विवादों को लेकर राज्य में राजनीति और प्रशासनिक हलचल तेज है. सीआईडी जांच और विपक्ष के लगातार हमलो के बीच जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने पहली बार इस पूरे मामले पर अपनी बात

राँची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं और उसके विवादों को लेकर राज्य में राजनीति और प्रशासनिक हलचल तेज है. सीआईडी जांच और विपक्ष के लगातार हमलो के बीच जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने पहली बार इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी है. उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली, गोपनीयता, परीक्षा एजेंसी के चयन और सीआईडी जांच को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से स्थिति स्पष्ट की है. वहीं दूसरी तरफ सीआईडी ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को 28 जुलाई को पूछताछ के लिए तलब किया है. जांच एजेंसी उनसे परीक्षा संचालन, परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया, आउटसोर्स एजेंसी के चयन और आयोग के प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सवाल-जवाब करेगी.

पद संभालने की चुनौतियां और रिफॉर्म्स की कोशिश
पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने बताया कि जब छह मार्च 2025 में उन्होंने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी, तब आयोग कई तरह की कठिनाइयों से गुजर रहा था और बड़े पैमाने पर मामले पेंडिंग थे. उन्होंने कहा जनवरी-फरवरी तक पेंडिंग बैकलॉग और शिक्षकों की प्रोन्नति से जुड़े कई मामलों का निष्पादन किया. उन्होंने आगे कहा कि जेपीएससी का इतिहास हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन चुनौतियों के बावजूद आयोग में प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक सुधार की सख्त जरूरत थी.

स्ट्रांग रूम और परीक्षा की गोपनीयता
परीक्षाओं में गड़बड़ी और लीक के आरोपों पर पूर्व अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को जमा करने से लेकर स्ट्रांग रूम तक की प्रक्रिया बेहद गोपनीय होती है.परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा और गोपनीयता आयोग का सबसे संवेदनशील हिस्सा है. स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत हर स्तर पर जिम्मेदारियां तय होती हैं. मैंने अपने कार्यकाल के दौरान आयोग की इन प्रक्रियाओं और रिफॉर्म्स पर विशेष जोर दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य परीक्षा के रिजल्ट प्रोसेसिंग या मूल्यांकनों में नियम के परे जाकर अध्यक्ष की कोई सीधी व्यक्तिगत भूमिका नहीं होती. नियमों के आधार पर ही कार्य करना उचित होता है.

शिकायतें और एविडेंस पर दिया जवाब
विपक्ष और अन्य माध्यमों से छह महीने पहले शिकायतें मिलने और उन पर संज्ञान न लेने के आरोपों पर ख्यांगते ने कहा आयोग में रोजाना विभिन्न माध्यमों (ईमेल, पोस्ट) से कई तरह की शिकायतें और आवेदन आते रहते हैं. आयोग की प्राथमिकता हमेशा यही रहती है कि परीक्षा प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से पूरी हो. जो भी अधिकारी या कर्मी जिस काम में लगे हैं, वे अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएं.

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी विवाद पर सफाई
परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी के विवाद और सीआईडी जांच के संदर्भ में पूर्व अध्यक्ष ने कहा आयोग जब भी किसी एजेंसी का चयन करता है, तो पूरी जांच-परख की जाती है कि वह पूरी तरह से निष्पक्ष और स्वच्छ हो. उन्होंने स्पष्ट किया कि एजेंसी के चयन के समय या बाद में अगर कोई मिसिंग लिंक रहा हो या वह बाद में ब्लैकलिस्ट हुई हो, तो इसकी जानकारी उनके संज्ञान में नहीं थी. सीआईडी और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी कोई गलती या गड़बड़ी हुई है, चाहे वह एजेंसी के स्तर पर हो या पदाधिकारियों के, तो निष्पक्ष जांच के जरिए सच सामने आना चाहिए और दोषियों पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए.

अध्यक्ष के विशेषाधिकार और प्रक्रिया
अध्यक्ष की शक्तियों और विशेषाधिकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि आयोग में प्रक्रिया के तहत बोर्ड और सदस्यों के साथ मिलकर निर्णय लिए जाते हैं. जो बातचीत या प्रक्रियाएं आयोग के भीतर गोपनीय होती हैं, उन्हें उसी दायरे में रखा जाता है और नियमों के तहत ही सभी फैसले लिए जाते हैं.

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