चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के डीसी मनीष कुमार ने गुरुवार को सदर अस्पताल, चाईबासा के इमरजेंसी वार्ड का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर उपचार, दवा उपलब्धता और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर फीडबैक लिया।
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निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल, सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी, अस्पताल के चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी भी मौजूद रहे।
इमरजेंसी सेवाओं में लापरवाही पर सख्त निर्देश
डीसी ने इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के उपचार, दवा उपलब्धता, चिकित्सकीय उपकरणों की कार्यशीलता, साफ-सफाई, बेड प्रबंधन, नर्सिंग सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से इमरजेंसी सेवाओं के संचालन, मरीजों की संख्या, चिकित्सकों की उपलब्धता और संसाधनों की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि आपातकालीन सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक मरीज को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए। साथ ही चिकित्सकों को मरीजों के प्रति संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।

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सीएसआर मद से मिलीं 1000 मच्छरदानियां
निरीक्षण के बाद डीसी ने सिविल सर्जन कार्यालय को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) मद के तहत 1000 मच्छरदानियां उपलब्ध कराईं। उन्होंने बताया कि मलेरिया प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले में कुल 10 हजार मच्छरदानियों का वितरण किया जाएगा। पहले चरण में मिली 1000 मच्छरदानियां स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिन्हित गांवों और जरूरतमंद परिवारों के बीच वितरित की जाएंगी।
मलेरिया और डेंगू से बचाव की अपील
डीसी ने कहा कि जिला प्रशासन मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए जांच, उपचार, जागरूकता, स्रोत नियंत्रण और बचाव अभियान लगातार चला रहा है। उन्होंने लोगों से नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने, घर के आसपास जलजमाव नहीं होने देने, साफ-सफाई बनाए रखने तथा बुखार, कपकपी, सिरदर्द या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की अपील की।
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