नई दिल्ली : धनतेरस का त्योहार खुशहाली, अच्छी सेहत और घर में धन-दौलत आने का पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है। धनतेरस की शाम घर में 13 दीये जलाने की भी खास परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन 13 दीपक जलाने से घर में बरकत आती है, नकारात्मकता दूर होती है और परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
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धनतेरस पर 13 दीपक जलाने का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम 13 दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इनमें एक दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा में जलाया जाता है। इसे यम दीपदान कहते हैं। मान्यता है कि यमराज को दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और सुरक्षा की कामना की जाती है। घर के बाकी स्थानों पर दीपक जलाकर माता लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। दीपक की रोशनी को अंधकार, नकारात्मकता और दुर्भाग्य दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
ज्योतिष में 13 अंक का क्या है महत्व?
धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में 13 अंक को धनतेरस से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन दीपदान करने से जीवन में स्थिरता आती है। साथ ही आर्थिक उन्नति और सकारात्मकता का मार्ग प्रशस्त होता है। हालांकि, 13 अंक के महत्व को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न मान्यताएं प्रचलित हैं।
इन स्थानों पर जलाएं 13 दीपक
धनतेरस पर घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, तुलसी के पास, रसोई और अन्य प्रमुख स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा है। इनमें दक्षिण दिशा में यम दीपक जलाना विशेष शुभ माना जाता है। दीपक जलाते समय परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करनी चाहिए।
दीपदान करते समय इन बातों का रखें ध्यान
धनतेरस पर दीपदान करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।
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दीपक में शुद्ध घी या तिल के तेल का इस्तेमाल करें।
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पूजा स्थल और घर के मुख्य द्वार को साफ रखें।
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दीपक जलाते समय मन में सकारात्मक भाव रखें।
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दक्षिण दिशा में यम दीपक जलाने की परंपरा का पालन करें।
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दीपक को ऐसी जगह रखें, जहां आग लगने का खतरा न हो।
धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह जीवन में प्रकाश, आशा और सकारात्मकता का संदेश भी देती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ दीपदान करने से त्योहार की आध्यात्मिक भावना और गहरी होती है।
Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इन मान्यताओं की पुष्टि का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।


