राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर SC सख्त, ट्रस्ट और SIT से एक हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
SIT

नई दिल्ली : राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट (SC) ने राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) से भी जांच की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की जाएगी और इसकी प्रति याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह समझ सकता है कि मामले की जांच जारी है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई (सोमवार) को होगी।

चार याचिकाओं पर सुनवाई, निष्पक्ष जांच की मांग

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले में दायर चार याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इनमें दो याचिकाओं में मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। वहीं, एक अन्य याचिका में विशेष जांच दल (SIT) से जांच, साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी आवश्यक है। इन याचिकाओं में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की रिट याचिका, अजय कुमार राय की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका तथा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद सुधाकर सिंह की याचिका शामिल है।

दान रिकॉर्ड और CCTV सुरक्षित रखने की मांग

अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की याचिका में राम जन्मभूमि मंदिर में प्राप्त दान से जुड़े अभिलेखों और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ चढ़ावे के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक मंदिर में चढ़ावा एक पवित्र न्यास संपत्ति है और इसका प्रबंधन करने वाले न्यासी पारदर्शिता, जवाबदेही और संरक्षण के दायित्व से बंधे होते हैं। इसमें दान और चढ़ावे से जुड़े सभी अभिलेख, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल लॉग को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की गई है। साथ ही अब तक प्राप्त दान और मूल्यवान वस्तुओं का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराने और राष्ट्रीय महत्व के मंदिरों में चढ़ावे के पारदर्शी प्रबंधन के लिए आवश्यक संवैधानिक व्यवस्था एवं सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

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