हैदराबाद : तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पुलिस ने जाली नोट छापने और उन्हें बाजार में चलाने वाले एक अनोखे रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक ज़ोमैटो (Zomato) का डिलीवरी बॉय, एक रैपिडो (Rapido) बाइक टैक्सी ड्राइवर और एक ऑटो चालक शामिल है। पुलिस के अनुसार, ये तीनों आरोपी दिन के समय डिलीवरी और सवारी ढोने का काम करते थे, ताकि किसी को उन पर शक न हो, और रात में नकली नोटों की छपाई करते थे।
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सोशल मीडिया से सीखा नोट छापने का तरीका
हैदराबाद पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि तीनों आरोपियों ने जाली नोट बनाने की कला किसी पेशेवर गिरोह से नहीं, बल्कि यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर मौजूद वीडियो देखकर सीखी थी। इंटरनेट से तरीका सीखने के बाद आरोपियों ने उच्च गुणवत्ता वाले प्रिंटर, स्कैनर, वॉटरमार्क पेपर और अन्य उपकरण खरीदे। वे साधारण कागजों पर गांधी जी की फोटो और सुरक्षा थ्रेड प्रिंट करके हूबहू असली जैसे दिखने वाले नकली नोट तैयार करते थे।
1,124 जाली नोट बरामद
पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने पर छापेमारी कर 2,91,000 रुपये मूल्य के कुल 1,124 नकली नोट जब्त किए हैं। इसके साथ ही जाली नोटों की छपाई में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक कलर प्रिंटर, स्कैनर, विशेष वॉटरमार्क पेपर और अन्य संदिग्ध सामग्रियां भी बरामद की गई हैं।
आम जिंदगी की आड़ में चल रहा था काला कारोबार
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी बेहद शातिराना अंदाज में काम करते थे। दिनभर कोई घर-घर खाना पहुंचाता था, तो कोई बाइक और ऑटो से सवारियां छोड़कर अपने परिवार का खर्च चलाता था। बाहर से साधारण दिखने वाले इन तीनों लोगों का मुख्य मकसद नकली नोटों को भीड़भाड़ वाले बाजारों, स्थानीय दुकानों और छोटे व्यापारियों के बीच खपाना था। हैदराबाद पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि इन्होंने अब तक बाजार में कितने जाली नोट खपाए हैं और क्या इस सिंडिकेट में कुछ और लोग भी शामिल हैं।





