धनबाद : करीब 12 वर्षों से हावड़ा यार्ड में धूल फांक रही देश की पहली एसी डबल डेकर ट्रेन के एक बार फिर पटरी पर लौटने की उम्मीदें जगी हैं। कोलकाता में आयोजित ‘PCME कॉन्फ्रेंस-2026’ में पूर्व रेलवे ने रेलवे बोर्ड के सदस्यों और देश भर के प्रधान मुख्य यांत्रिक अभियंताओं के सामने लंबे समय से लंबित धनबाद-हावड़ा डबल डेकर रैक के निस्तारण और संचालन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। पूर्व रेलवे ने रेलवे बोर्ड से इस ट्रेन के रैक के भविष्य और परिचालन के संबंध में दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया है। बोर्ड स्तर पर मामला पहुंचने के बाद अब जल्द ही कोई बड़ा फैसला होने की संभावना है।
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2011 में हुई थी धूमधाम से शुरुआत
देश की इस पहली एसी डबल डेकर ट्रेन की शुरुआत 1 अक्टूबर 2011 को तत्कालीन रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने हावड़ा स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर की थी। शुरुआत में यात्रियों के बीच भारी उत्साह था, लेकिन बाद में महंगे किराए और असुविधाजनक समय-सारिणी (सुबह 5 बजे धनबाद से रवानगी और दोपहर 3:20 बजे हावड़ा से वापसी) के कारण यात्रियों की संख्या लगातार घटती गई।
कम ऑक्यूपेंसी और घाटे के कारण हुई बंद
रेलवे आंकड़ों के मुताबिक, ट्रेन में यात्रियों की संख्या सिमटकर महज 13 से 22 प्रतिशत के बीच रह गई थी। भारी घाटे के कारण रेलवे ने 1 जनवरी 2016 से इसकी नियमित सेवा को बंद कर दिया। हालांकि, वर्ष 2016 में छठ पूजा के दौरान इसे स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाया गया था, लेकिन उसके बाद से यह पूरी तरह बंद पड़ी है।
प्लेटफॉर्म और ओवरहेड तारों में किए गए थे बदलाव
सामान्य ट्रेनों से अधिक ऊंची और चौड़ी होने के कारण इसके परिचालन के लिए धनबाद से हावड़ा के बीच कई स्टेशनों के प्लेटफॉर्म छज्जों को काटा गया था और ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) तारों की ऊंचाई बढ़ाई गई थी। वर्ष 2018 में इसे हावड़ा से पारसनाथ तक चलाने की योजना भी बनी थी, जो ट्रायल से पहले ही अधर में लटक गई।
रेलवे बोर्ड की हरी झंडी का इंतजार
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) शिवराम मांझी ने बताया कि डबल डेकर रैक को लेकर अभी रेलवे बोर्ड स्तर से कोई अंतिम आदेश नहीं आया है। रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद ही इसके नए रूट या समय-सारिणी के साथ पुनरारंभ की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





