रांची / मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के बैतूल में जैन समाज का एक अनोखा और भावुक आयोजन देखने को मिला। जज की परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति से पहले ही प्रखरश्री दीदी ने सांसारिक जीवन छोड़कर जैन दीक्षा का मार्ग चुन लिया।
उनके साथ चार अन्य दीक्षार्थी बहनों की भी भव्य बिनौली निकाली गई। इस चल समारोह में विंटेज कारों का काफिला, शाही बग्घियां और राजस्थान के उदयपुर से आया बैंड आकर्षण का केंद्र रहे। शहर की सड़कों पर निकली इस बिनौली में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग और श्रद्धालु शामिल हुए।
माता-पिता का सपना किया पूरा , फिर चुना मार्ग वैराग्य का
प्रखरश्री दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वे जज बनें। उन्होंने जज की परीक्षा पास कर उनका सपना पूरा भी किया, लेकिन बचपन से ही उनके मन में वैराग्य का भाव था। उनका मानना है कि जज या वकील बनकर वे समाज की उतनी सेवा नहीं कर पाएंगी, जितनी भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर कर सकती हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया।



