रांची। हिंदी साहित्य भारती, झारखंड एवं पंडित राजकुमार शुक्ल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता, महान स्वतंत्रता सेनानी एवं किसान चेतना के अग्रदूत पंडित राजकुमार शुक्ल जी की 151वीं जयंती के अवसर पर रांची प्रेस क्लब में भव्य समारोह आयोजित किया गया। समारोह में वक्ताओं ने पंडित राजकुमार शुक्ल के ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करते हुए केंद्र सरकार से उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक एवं पूर्व मंत्री सी.पी. सिंह ने पंडित राजकुमार शुक्ल के जीवन, संघर्ष और चंपारण सत्याग्रह में उनकी निर्णायक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राजकुमार शुक्ल केवल एक किसान नहीं, बल्कि किसानों की पीड़ा को राष्ट्रीय आंदोलन का विषय बनाने वाले महान जननायक थे। उन्होंने अपने अदम्य संकल्प और निरंतर प्रयास से महात्मा गांधी को चंपारण आने के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप देश के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा मिली।
विशिष्ट अतिथि साहित्यकार डॉ. मयंक मुरारी ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल का व्यक्तित्व भारतीय किसान की संघर्षशील चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इतिहास में अक्सर बड़े आंदोलनों के नेतृत्वकर्ताओं को याद किया जाता है, लेकिन उन आंदोलनों की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले व्यक्तित्वों को अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाता। राजकुमार शुक्ल ने अपनी जिद, प्रतिबद्धता और राष्ट्रहित की भावना से गांधीजी को चंपारण तक पहुंचाया। उनके संघर्ष ने किसान प्रश्न को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया।
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झारखंड विधानसभा के पूर्व संयुक्त सचिव मिथिलेश कुमार मिश्र ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल का योगदान केवल चंपारण तक सीमित नहीं था। उनका संघर्ष भारतीय लोकतांत्रिक चेतना और किसान अधिकारों की मजबूत आधारशिला बना। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान से परिचित कराने की आवश्यकता है।
हिंदी साहित्य भारती (अंतरराष्ट्रीय) के महासचिव श्रीनिवास शुक्ल ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल की गाथा भारतीय इतिहास में किसान के आत्मसम्मान और संघर्ष की अमर कहानी है। वहीं डॉ. अरुण सज्जन ने कहा कि साहित्य और इतिहास के माध्यम से राजकुमार शुक्ल के योगदान को देशभर में व्यापक रूप से सामने लाने की जरूरत है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी साहित्य भारती (अंतरराष्ट्रीय), झारखंड एवं पंडित राजकुमार शुक्ल फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय राय ने की। उन्होंने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल को उनके योगदान के अनुरूप सम्मान आज तक नहीं मिल पाया है। उन्होंने केंद्र सरकार से उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान करने की मांग करते हुए कहा कि चंपारण सत्याग्रह की आधारभूमि तैयार करने में राजकुमार शुक्ल की भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना चाहिए।
अजय राय ने रांची के ऐतिहासिक गांधी–गेट वार्ता प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि 1917 में रांची में महात्मा गांधी और तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर सर एडवर्ड गेट के बीच चंपारण के किसान प्रश्न पर हुई महत्वपूर्ण वार्ताओं को इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि चंपारण के खेतों से उठी किसान की आवाज राजकुमार शुक्ल के माध्यम से गांधीजी तक पहुंची और आगे चलकर किसान आंदोलन की दिशा तय हुई।
इस अवसर पर स्वास्थ्य, समाज सेवा एवं कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. सतीश शर्मा, श्री शंकर दुबे एवं डॉ. मृणालिनी अखौरी को मोमेंटो एवं शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में अशोक कुमार शुक्ला, अमित कश्यप, अजय शर्मा, अरुण अग्रवाल, संजय सर्राफ, बालेश्वर शर्मा, शिव कुमार झा, सुरेंद्र सिंह, असलम खान, त्रिपुरेश्वर मिश्र, बबलू कुमार, देवानंद राय, अनिकेत सिंह, मुकेश साहू, रमेश साहू, आलोक झा, उपेन्द्र कुमार, बहादुर सिंह, जलील अंसारी, मनोज भट्ट, विकास कुमार सहित सैकड़ों साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने पंडित राजकुमार शुक्ल के संघर्ष, किसान चेतना और राष्ट्रनिर्माण में उनके अमूल्य योगदान को नमन किया।




