उपेंद्र कुशवाहा ने विरासत और आरक्षण पर रखी बात, युवाओं को लेकर भी बोले

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राजनीतिक विरासत सत्ता या सरकारी पद पर दावा नहीं, बल्कि पूर्वजों की विचारधारा और सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाना है।

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पटना: राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को कहा कि राजनीतिक विरासत का अर्थ किसी सरकारी पद या सत्ता पर दावा करना नहीं है। उनके मुताबिक विरासत का मतलब पूर्वजों से मिली विचारधारा, सीख और सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाना है। प्रेस वार्ता के दौरान कुशवाहा ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर और डॉ. राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम उनकी पार्टी के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दल भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका अंतिम मूल्यांकन जनता और इतिहास करेगा।

विरासत को लेकर बयान की गलत व्याख्या का आरोप

कुशवाहा ने कहा कि उनके विरासत संबंधी बयान की गलत व्याख्या की जा रही है। कौन सरकार में रहेगा और कौन नहीं रहेगा, यह विरासत का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दल और नेता विभिन्न मुद्दों पर अलग राय रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि असहमति के बावजूद सहमति के साथ आगे बढ़ा जाए। अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक मंचों की अपनी मर्यादा होती है और उसी के अनुरूप अपनी बात रखनी चाहिए।

जदयू से पुराने संबंधों का किया जिक्र

जनता दल यूनाइटेड से अपने पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने संगठन को खड़ा करने में अपना खून-पसीना लगाया है। उन्होंने निशांत कुमार के प्रति स्नेह और आशीर्वाद की बात कही। उन्होंने निशांत कुमार और दीपक प्रकाश को भविष्य का युवा नेतृत्व बताते हुए कहा कि दोनों को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। कुशवाहा ने यह भी कहा कि मीडिया में कई बार उन्हें और सम्राट चौधरी को आमने-सामने दिखाने की कोशिश की जाती है, जबकि वास्तविकता में ऐसा कोई विवाद नहीं है। उन्होंने समता पार्टी के गठन के समय नीतीश कुमार के साथ बिहार में किए गए संघर्ष का भी उल्लेख किया।

65 प्रतिशत आरक्षण लागू कराने की मांग दोहराई

आरक्षण के मुद्दे पर कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने बिहार में पिछड़ा, अत्यंत पिछड़ा और अन्य वंचित वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने का प्रयास किया था। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इस अधूरे प्रयास को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है। कुशवाहा के मुताबिक उनकी पार्टी ने 65 प्रतिशत आरक्षण लागू कराने की मांग को अपने प्रमुख प्रस्तावों में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि बिहार में जातीय सर्वे के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था तैयार की गई थी और उनकी पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी।

युवाओं के मुद्दे पर भी बोले कुशवाहा

युवाओं के मुद्दे पर कुशवाहा ने कहा कि आज की पीढ़ी की सोच और परिस्थितियां बदल चुकी हैं। ऐसे में युवाओं की बात सुनना, उनके साथ संवाद करना और उनकी उचित मांगों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुराने तरीके से युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता और बदलते समय के अनुसार युवाओं के साथ संवाद का तरीका भी बदलना होगा।

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