नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने राज्यों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और विकास परियोजनाओं के साथ पूंजीगत व्यय को गति देने के लिए शनिवार को 1,09,019 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कर हस्तांतरण राशि जारी की। यह राशि 10 अगस्त को जारी होने वाले नियमित मासिक कर हस्तांतरण से अलग है। केंद्र सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, 1 अगस्त को अतिरिक्त कर हस्तांतरण की राशि जारी करना राज्यों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने और उन्हें पूंजीगत निवेश व विकास परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया कदम है।
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इस अतिरिक्त कर हस्तांतरण में उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 19,208 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके बाद बिहार को 10,845 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 8,010 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल को 7,866 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 7,022 करोड़ रुपये और राजस्थान को 6,460 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
झारखंड को मिले 3,660 करोड़ रुपये
अतिरिक्त कर हस्तांतरण के तहत झारखंड को 3,660 करोड़ रुपये की राशि दी गई है। इसके अलावा ओडिशा को 4,819 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 4,597 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 4,504 करोड़ रुपये और तमिलनाडु को 4,466 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त राशि से राज्यों को विकास परियोजनाओं, पूंजीगत खर्च और अन्य जरूरी योजनाओं पर काम तेज करने में मदद मिलेगी। इससे पहले केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में भी राज्यों को 1,01,603 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कर हस्तांतरण राशि जारी की थी। उस समय यह राशि नियमित मासिक हस्तांतरण से अलग दी गई थी। तत्कालीन अतिरिक्त राशि का उद्देश्य त्योहारों के मौसम को देखते हुए राज्यों को पूंजीगत खर्च बढ़ाने और विकास व कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना था।
पहली तिमाही में 3.1 लाख करोड़ रहा राजकोषीय घाटा
इसी बीच, कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (सीजीए) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 3.1 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पूरे वित्त वर्ष के लिए तय बजटीय लक्ष्य का 18.2 प्रतिशत है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में राजकोषीय घाटा 2.8 लाख करोड़ रुपये था। इसके मुकाबले इस बार घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि राजस्व संग्रह मजबूत रहने के बावजूद सरकार ने खर्च में वृद्धि की है।
शुद्ध कर राजस्व बढ़कर 6.4 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 16.96 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा निर्धारित किया है। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 4.3 प्रतिशत है और सरकार की राजकोषीय सुदृढ़ीकरण रणनीति के अनुरूप है। अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान केंद्र सरकार का शुद्ध कर राजस्व बढ़कर 6.4 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 5.4 लाख करोड़ रुपये था। आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर संग्रह में मजबूत बढ़ोतरी बनी हुई है।




