चैनपुर। झारखंड के गुमला जिले के चैनपुर में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण नौवीं कक्षा की छात्रा शिवानी कुमारी की मौत के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन करने वाली संस्था सम्मान प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
यह कार्रवाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) चैनपुर की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दीपशिखा किंडो की लिखित शिकायत के आधार पर की गई है। उन्होंने संस्था की लापरवाही को छात्रा की मौत का प्रमुख कारण बताते हुए चैनपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का आग्रह किया था।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने एजेंसी पर लगाए गंभीर आरोप
डॉ. दीपशिखा किंडो ने अपने आवेदन में कहा है कि यदि 108 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं थी या वाहन खराब था, तो संचालक एजेंसी को पहले ही इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। ऐसा होने पर मरीज को गुमला सदर अस्पताल पहुंचाने के लिए समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती थी।उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी ने मामले की जिम्मेदारी तो ली, लेकिन समय पर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए, जिससे एक छात्रा की जान चली गई।
चालक ने दी थी एंबुलेंस खराब होने की सूचना
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही चालक को शिवानी को गुमला सदर अस्पताल ले जाने का निर्देश मिला, उसने तत्काल संचालन एजेंसी को एंबुलेंस खराब होने की जानकारी दे दी थी। इसके बावजूद एजेंसी की ओर से दूसरी एंबुलेंस या किसी वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था नहीं की गई।बताया जाता है कि चालक काफी देर तक खराब एंबुलेंस को चालू करने की कोशिश करता रहा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
पिकअप वाहन से अस्पताल ले जाते समय हुई मौत
एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने पर परिजन मजबूर होकर शिवानी को एक पिकअप वाहन से गुमला सदर अस्पताल लेकर निकले। वहां से उसे बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं और 108 एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस ने शुरू की जांच
चैनपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की शिकायत के आधार पर सम्मान प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और 108 एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध होती, तो संभवतः छात्रा की जान बचाई जा सकती थी




