पश्चिमी सिंहभूम : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान को मंगलवार को एक बड़ी सफलता मिली। चाईबासा स्थित कोल्हान पुलिस मुख्यालय में राज्य सरकार की उग्रवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर चार हार्डकोर नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों में दस लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर सालुका कयाम उर्फ भुवनेश्वर, एक लाख रुपये का इनामी कोदोमुनी कोड़ा, अनिता तामसोय उर्फ अनिता कयाम और पिंकी शामिल हैं। इस दौरान नक्सलियों ने अपने हथियार, कारतूस और अन्य नक्सली सामग्री पुलिस अधिकारियों को सौंप दी।
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कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी
कार्यक्रम में कोल्हान के डीआईजी अनुरंजन किस्टोपा, सीआरपीएफ चाईबासा के डीआईजी, पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु और सरायकेला-खरसावां के एसपी मनोज स्वर्गियारी सहित कई वरिष्ठ पुलिस एवं सुरक्षा बलों के अधिकारी उपस्थित रहे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जोनल कमांडर सालुका कयाम, कोदोमुनी कोड़ा और पिंकी ने पश्चिमी सिंहभूम पुलिस के समक्ष सरेंडर किया, जबकि अनिता तामसोय ने सरायकेला-खरसावां पुलिस के सामने हथियार डाले। पिछले चार वर्षों में कोल्हान क्षेत्र में अब तक 75 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके अलावा कई बड़े उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है और कुछ मुठभेड़ में मारे भी गए हैं।

डीआईजी ने कहा कि…
करीब तीन दशक तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे कोल्हान क्षेत्र में सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों और मजबूत खुफिया तंत्र के कारण नक्सली संगठनों का प्रभाव अब तेजी से सिमट रहा है। कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्टोपा ने इस घटनाक्रम को नक्सल विरोधी अभियान की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने अभियान में शामिल सभी सुरक्षा बलों का आभार व्यक्त किया और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। डीआईजी ने बताया कि क्षेत्र में अब मुख्य रूप से असीम मंडल का दस्ता सक्रिय बचा है। उन्होंने असीम मंडल और उसके दस्ते से हथियार छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने तथा मुख्यधारा में लौटने की अपील की।





