रांची/नई दिल्ली : झारखंड में JPSC और JSSC के माध्यम से हुई नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सामने आ रहे नए मामलों पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रियाओं से जुड़े आरोपों ने झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ-साथ राज्य की प्रतिष्ठा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संजय सेठ ने JPSC और JSSC से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच CBI से कराने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि केवल राज्य स्तरीय जांच के भरोसे रहने से महत्वपूर्ण साक्ष्यों के प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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हर दिन सामने आ रहे नए मामले
संजय सेठ ने कहा कि पिछले कई दिनों से JPSC और JSSC की नियुक्तियों को लेकर लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर दिन अखबारों में नियुक्ति प्रक्रियाओं से जुड़े नए मामले प्रकाशित हो रहे हैं, जिससे झारखंड की प्रतिष्ठा पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि JSSC के माध्यम से हुई नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कथित खरीद-फरोख्त के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने CID जांच की अनुशंसा की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच आगे बढ़ी और कुछ अधिकारियों ने मामले की निष्पक्षता से जांच करने का प्रयास किया, तो उनका तबादला क्यों किया गया। संजय सेठ ने कहा कि JPSC के मामलों में भी इसी तरह के सवाल सामने आए हैं। उन्होंने पूछा कि जो अधिकारी कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने का प्रयास कर रहे थे, उनका तबादला क्यों किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति प्रक्रियाओं की सच्चाई सामने नहीं आने देना चाहती।
महिला पर्यवेक्षक नियुक्ति पर भी उठाए सवाल
संजय सेठ ने कहा कि JSSC के माध्यम से हुई महिला पर्यवेक्षक नियुक्ति को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि तीन दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और डिग्री से जुड़े तथ्य प्रथम दृष्टया कई सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि इन अभ्यर्थियों ने एक ही विश्वविद्यालय से, एक ही अवधि में और एक ही विषय में स्नातक किया है। इंटरमीडिएट के वर्षों बाद एक साथ स्नातक की डिग्री हासिल करने के मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। संजय सेठ ने 300 में 299 अंक प्राप्त करने वाली अभ्यर्थी का चयन नहीं होने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इससे पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की कि यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमसम्मत है, तो सरकार को सामने आकर सभी सवालों का जवाब देना चाहिए।
युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला
संजय सेठ ने कहा कि झारखंड के हजारों युवा अपनी मेहनत और प्रतिभा के आधार पर सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं। नियुक्तियों में भ्रष्टाचार, अनियमितता या पक्षपात के आरोप केवल किसी एक परीक्षा या नियुक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह लाखों युवाओं के विश्वास से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से विद्यार्थी शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार के पास उनसे संवाद करने तक का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन कर रहे छात्रों की बात सुनना और उनसे संवाद करना सरकार की जिम्मेदारी है।
संजय सेठ ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संरक्षण में चल रही झामुमो, कांग्रेस, राजद और वामपंथी दलों की सरकार यदि युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है, तो उसे पूरे मामले पर तत्काल स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार में नैतिकता और युवाओं के भविष्य के प्रति संवेदनशीलता बची है, तो JPSC और JSSC से जुड़े सभी गंभीर मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए इन्हें अविलंब CBI को सौंपा जाना चाहिए।
संजय सेठ ने कहा कि झारखंड के युवाओं के साथ किसी भी कीमत पर अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। यदि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता हुई है, तो दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिलना चाहिए।




