चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने रखी ये शर्त

नई दिल्ली : चेक बाउंस के सात अलग-अलग मामलों में 3 महीने की सजा काट रहे बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने राजपाल यादव को पुलिस या

राजपाल यादव

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नई दिल्ली : चेक बाउंस के सात अलग-अलग मामलों में 3 महीने की सजा काट रहे बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने राजपाल यादव को पुलिस या अदालत के समक्ष सरेंडर करने से अंतरिम छूट दे दी है। हालांकि, अदालत ने इसके लिए शर्त रखी है कि याचिकाकर्ताओं को बुधवार तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये की राशि जमा करानी होगी।

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सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने जारी किया नोटिस

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष मंगलवार को राजपाल यादव के वकील ने मामले का विशेष उल्लेख किया। याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीठ ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर 15 सितंबर 2026 तक जवाब मांगा है। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया, “याचिकाकर्ताओं द्वारा कल (9 सितंबर) तक इस कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा किए जाने की शर्त पर, उन्हें फिलहाल सरेंडर करने से छूट दी जाती है।”

दिल्ली हाईकोर्ट के सजा के आदेश को दी गई है चुनौती

दरअसल, राजपाल यादव और उनकी पत्नी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें हाईकोर्ट ने सात चेक बाउंस मामलों में अभिनेता की सजा को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने प्रत्येक मामले में उन्हें तीन महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए दो महीने का समय देते हुए तब तक सजा को सस्पेंड रखा था।

हाईकोर्ट ने मुआवजा देने का दिया था निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में निर्देश दिया था कि सातों मामलों की सजाएं एक साथ चलेंगी। इसके साथ ही राजपाल यादव को प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया गया था (जिसमें 1,04,75,000 रुपये शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में और 25,000 रुपये राज्य को देय हैं)। वहीं उनकी पत्नी राधा यादव को हर मामले में 5,51,380 रुपये अलग से देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने यह भी नोट किया था कि कानूनी कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को पूर्व में 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जिसे अंतिम बकाया राशि और मुआवजे की गणना में समायोजित किया जाएगा।

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