सेनाओं के आधुनिकीकरण को मिलेगी नई गति, 2029 तक ₹3 लाख करोड़ रक्षा उत्पादन का लक्ष्य : संजय सेठ

जैसलमेर, राजस्थान: रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ आज मंगलवार को जैसलमेर, राजस्थान में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य विषय ‘भारतीय सशस्त्र सेनाओं

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जैसलमेर, राजस्थान:  रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद  संजय सेठ आज  मंगलवार को जैसलमेर, राजस्थान में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य विषय ‘भारतीय सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण’ रहा।
बैठक में वर्तमान एवं भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध की बदलती रणनीतियों, आधुनिक तकनीक, सैन्य संसाधनों के विकास तथा भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की परिचालन क्षमता को और अधिक सशक्त बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारतीय सेनाओं को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित, आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम बनाना है। उन्होंने वर्ष 2029 तक ₹3 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और ₹50 हजार करोड़ के रक्षा निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि रक्षा आधुनिकीकरण केवल नए हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी क्षमता, स्वदेशी अनुसंधान और मजबूत सैन्य संरचना के विकास का व्यापक अभियान है।
रक्षा राज्य मंत्री  संजय सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर रहा है। रक्षा उत्पादन में निरंतर वृद्धि और रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय विस्तार इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा विनिर्माण के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में हमारी सेनाओं का तकनीकी रूप से आधुनिक, सामरिक रूप से सक्षम और स्वदेशी संसाधनों से सुसज्जित होना समय की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार, DRDO, निजी उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के माध्यम से भारत अपनी सामरिक शक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

इन बिंदुओं पर हुआ मंथन :

आधुनिक सैन्य क्षमता: आधुनिक हथियारों, अगली पीढ़ी के रक्षा उपकरणों और अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों का विकास।
तीनों सेनाओं में समन्वय: थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल एवं संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत करना।
 स्वदेशी रक्षा उत्पादन: मेक इन इंडिया के माध्यम से देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण और रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन।
आधुनिक तकनीक का उपयोग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसी तकनीकों का विस्तार।
अनुसंधान एवं नवाचार: DRDO, निजी उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
समयबद्ध आधुनिकीकरण: रक्षा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग।
नई सैन्य संरचनाएं: आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप ‘असनी’, ‘भैरव’ और ‘शक्तिबाण’ प्लाटून की भूमिका पर विचार-विमर्श।

रक्षा क्षेत्र में भारत की प्रमुख उपलब्धियां

– वित्तीय वर्ष 2026-27 में रिकॉर्ड ₹7.85 लाख करोड़ का रक्षा बजट।
– रक्षा आधुनिकीकरण एवं पूंजीगत खरीद के लिए ₹2.19 लाख करोड़ का प्रावधान।
– रक्षा उत्पादन वर्ष 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ पहुंचा।
– रक्षा निर्यात वर्ष 2014 में ₹2,000 करोड़ से भी कम था, जो अब लगभग ₹40,000 करोड़ तक पहुंच गया है।
बैठक में वर्ष 2029 तक ₹3 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर भी चर्चा हुई।
बैठक में सांसदों ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे, ताकि भारतीय सशस्त्र सेनाओं को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप और अधिक सक्षम बनाया जा सके।
इस अवसर पर लोकसभा एवं राज्यसभा के  सांसदों के साथ रक्षा सचिव  राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण सचिव श्रीमती सुकृति लिखी, रक्षा वित्त सचिव  विश्वजीत सहाय सहित रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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