झारखंड में रबी फसल डिजिटल क्रॉप सर्वे में राज्य की कुल 42.50% प्रगति दर्ज हुई. लोहरदगा, देवघर और धनबाद शीर्ष पर रहे, जबकि 14 जिले 50% का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके ।
रांची। झारखंड में रबी फसल के डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) का अब समाप्त हो गया है. इसमें राज्य का हाल बहाल रहा. पूरे राज्य में मात्र 42.50 प्रतिशत निधारित प्लॉट का सर्वे ही हो पाया। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार राज्य में चयनित दो करोड़ 60 लाख 75 हजार 447 प्लॉट में से केवल एक करोड़ 10 लाख 82 हजार 907 प्लॉट (42.50 प्रतिशत) का ही सर्वे पूरा हो सका। हालांकि इस धीमी प्रगति के बीच धनबाद ने 74.24 प्रतिशत सर्वे पूरा कर राज्य में तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि लोहरदगा (83.55 प्रतिशत) पहले और देवघर (78.66 प्रतिशत) दूसरे स्थान पर रहा। बता दें कि राज्य भर के 32,739 गांव के 263 ब्लॉक में क्रॉप सर्वे का काम किया गया।
धनबाद के 14.57 लाख प्लॉट में से 10.81 लाख का सर्वे
धनबाद जिले में 1,222 गांवों के 14 लाख 57 हजार 270 प्लॉट को डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए चयनित किया गया था। इनमें से 10 लाख 81 हजार 835 प्लॉट का सर्वे पूरा हुआ, जबकि 9 लाख 24 हजार 417 प्लॉट को स्वीकृति मिली। जिले में सर्वे का प्रतिशत 74.24 रहा। इस कार्य के लिए 50 सुपरवाइजर और 2,444 सर्वेयर निर्धारित किए गए थे। इनमें 86 सुपरवाइजर तथा 2,027 सर्वेयर (1,617 पंजीकृत सर्वेयर और 410 सीएससी सर्वेयर) कार्य में जुड़े।
14 जिले 50 प्रतिशत भी नहीं छू सके
झारखंड के 24 जिलों में से 14 जिले ऐसे रहे जहां सर्वे 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पाया। सबसे खराब प्रदर्शन पश्चिमी सिंहभूम का रहा, जहां केवल 6.10 प्रतिशत सर्वे हो सका. इसके अलावा खूंटी (16.32%), दुमका (19.63%), गिरिडीह (24.39%), पाकुड़ (28.63%), लातेहार (28.67%), सरायकेला-खरसावां (29.70%) और रांची (31.76%) सहित कई जिले आधे लक्ष्य तक भी नहीं पहुंच सके।
29,213 सर्वेयर मैदान में उतरे
पूरे राज्य में डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए 1,315 सुपरवाइजर और 62,104 सर्वेयर की आवश्यकता आंकी गई थी. इनमें 1,291 सुपरवाइजर व 22,926 पंजीकृत सर्वेयर और 6,287 सीएससी सर्वेयर सहित कुल 29,213 सर्वेयर कार्य में लगाए गए. यानी जरूरत की तुलना में करीब 47 प्रतिशत सर्वेयर ही उपलब्ध हो सके, जिसका असर सर्वे की प्रगति पर भी पड़ा।
क्यों अधूरा रह गया सर्वे?
विशेषज्ञों के अनुसार सर्वे अधूरा रहने के पीछे कई कारण रहे. सबसे बड़ी वजह पर्याप्त सर्वेयरों की कमी रही। इसके अलावा कई स्थानों पर तकनीकी दिक्कतें, मोबाइल नेटवर्क की समस्या, किसानों की अनुपलब्धता, फसल कटाई के बाद खेतों की स्थिति बदल जाना, कठिन भौगोलिक क्षेत्र और समय सीमा के भीतर सभी प्लॉट तक नहीं पहुंच पाना भी प्रमुख कारण रहे। यही वजह है कि राज्य के अधिकांश जिले निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे रह गए।
सर्वे पर करोड़ों रुपये खर्च
डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए सरकार ने प्रति प्लॉट 10 रुपये की दर से सर्वेयरों को भुगतान तय किया था। राज्य में 1 करोड़ 10 लाख 82 हजार 907 प्लॉट का सर्वे होने के आधार पर अब तक इस कार्य पर लगभग 110.83 करोड़ रुपये का भुगतान बनता है. यदि सभी 2.60 करोड़ प्लॉट का सर्वे पूरा होता तो कुल व्यय लगभग 260.75 करोड़ रुपये होता।
डिजिटल क्रॉप सर्वे का उद्देश्य क्या है?
डिजिटल क्रॉप सर्वे का उद्देश्य खेतवार स्तर पर यह पता लगाना है कि किस किसान ने किस प्लॉट में कौन-सी फसल लगाई है। मोबाइल ऐप के माध्यम से खेत की जियो-टैगिंग, फसल की फोटो और अन्य विवरण ऑनलाइन दर्ज किए जाते हैं. इससे खेती का वास्तविक डेटाबेस तैयार होता है और कृषि योजनाओं की निगरानी आसान होती है।
किसानों को क्या होता है लाभ?
डिजिटल क्रॉप सर्वे से किसानों को फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा में मुआवजा, कृषि इनपुट सब्सिडी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से जुड़ी योजनाओं और अन्य सरकारी सहायता का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से मिल सकता है. इसके अलावा सरकार को उत्पादन का सटीक अनुमान मिलता है, जिससे नीति निर्माण और खाद्यान्न प्रबंधन में भी मदद मिलती है।
जिलावार आंकड़े
जिला- कुल प्लॉट -सर्वे (%)
लोहरदगा- 4,00,330-83.55
देवघर-12,07,218-78.66
धनबाद-14,57,270-74.24
साहिबगंज-6,06,105-69.29
हजारीबाग -14,35,547-68.85
पूर्वी सिंहभूम-12,72,139-65.33
गढ़वा-9,57,942- 61.85
कोडरमा- 5,21,317- 59.74
रामगढ़-3,38,350-53.55
चतरा-6,98,375 -52.56
जामताड़ा -11,25,835-49.50
गुमला-14,21,948-47.39
गोड्डा – 8,31,300- 41.80
पलामू- 12,51,963-39.29
सिमडेगा-10,75,028-35.86
बोकारो- 8,75,924-33.58
रांची- 16,99,735- 31.76
सरायकेला-खरसावां-9,60,259-29.70
लातेहार-6,85,590-28.67
पाकुड़- 7,44,383-28.63
गिरिडीह- 16,59,942 – 24.39
दुमका-18,53,760-19.63
खूंटी- 9,61,219- 16.32
पश्चिमी सिंहभूम- 20,33,968-6.10
कुल – 26075447- 42.50




