टोक्यो: आग लगने की घटनाओं पर तेज प्रतिक्रिया, आधुनिक तकनीक, मजबूत दमकल व्यवस्था और सुनियोजित शहरी ढांचे के कारण टोक्यो को दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों में गिना जाता है। जापान की इस सफलता के पीछे सदियों के दर्दनाक अनुभव और विनाशकारी आपदाओं से मिली सीख छिपी है। जापान में साल 1923 में आए भीषण भूकंप और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुई बमबारी में आग ने टोक्यो को भारी नुकसान पहुंचाया था।
इस घटना ने जापान को पुख्ता सुरक्षा उपाय अपनाने को विवश कर दिया। उस समय जापान में अधिकांश मकान लकड़ी के बने होते थे, जिससे आग तेजी से फैलती थी। इन घटनाओं के बाद शहर की योजना इस तरह तैयार की गई कि आग को फैलने से रोका जा सके। इसके बाद से अग्नि सुरक्षा टोक्यो के शहरी विकास की प्रमुख प्राथमिकता बन गई। टोक्यो फायर डिपार्टमेंट को दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सक्षम अग्निशमन विभाग माना जाता है। इसके पास लगभग 18,839 कर्मचारी हैं, जो दुनिया के किसी भी अन्य दमकल विभाग से अधिक बताए जाते हैं। पूरे महानगर में 81 फायर स्टेशन संचालित हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।
विभाग का वार्षिक बजट करीब 1,500 करोड़ रुपये है। इसके बेड़े में 673 फायर इंजन, 91 सीढ़ी वाहन, 393 एम्बुलेंस, 50 बचाव वाहन, 9 जलयान और 7 विमान शामिल हैं। टोक्यो की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत बुनियादी ढांचा भी है। शहर में बड़े पैमाने पर अग्निरोधी इमारतें बनाई गई हैं, जो आग को फैलने से रोकने का काम करती हैं। हिगाशी-शिराहिगे आवासीय परिसर इसका प्रमुख उदाहरण है। करीब 1.2 किलोमीटर लंबी और 18 मंजिला इमारतों की यह श्रृंखला एक विशाल अग्नि अवरोधक की तरह काम करती है। इसके अलावा, पुराने लकड़ी के घनी आबादी वाले इलाकों को कम करने, सड़कों को चौड़ा करने और खाली जगहों को आपदा रोकथाम पार्कों में बदलने का काम लगातार जारी है। टोक्यो फायर डिपार्टमेंट के पास विशेष बचाव दल भी हैं, जो भूकंप, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु आपदाओं जैसी जटिल परिस्थितियों से निपटने में प्रशिक्षित हैं।
शहर को 10 प्रशासनिक क्षेत्रों में बांटा गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय और तेज प्रतिक्रिया संभव हो पाती है। टोक्यो में हर साल लगभग 4,300 आग की घटनाएं दर्ज होती हैं। इसके बावजूद अधिकांश घटनाएं शुरुआती चरण में ही नियंत्रित कर ली जाती हैं। औसतन हर आग में केवल चार वर्ग मीटर क्षेत्र प्रभावित होता है, जो दर्शाता है कि आग को फैलने से पहले ही रोक लिया जाता है। शहर में रोजाना औसतन 12 आग की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन लगभग 90 प्रतिशत मामलों में वे बड़ी शहरी आपदा का रूप नहीं ले पातीं। विशेषज्ञों का कहना है कि टोक्यो का लक्ष्य केवल आग बुझाना नहीं, बल्कि आग को बड़ी घटना बनने से रोकना है। यही सोच और तैयारी उसे दुनिया के अन्य शहरों से अलग बनाती है।




