झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत होने जा रही है. रांची के कांके-नगरी क्षेत्र में 118.36 एकड़ जमीन पर बनने वाला ‘रिम्स-2’ सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि पूर्वी भारत का अत्याधुनिक हेल्थकेयर और रिसर्च हब होगा. बिडिंग डॉक्यूमेंट के मुताबिक इस मेगा प्रोजेक्ट को तीन चरणों- एडीबी फंडेड, स्टेट फंडेड और पीपीपी मोड में विकसित किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट पूरी तरह हाई-टेक, स्मार्ट और मरीज-केंद्रित होगा, जहां इलाज की प्रक्रिया तेज, सटीक और लगभग पेपरलेस होगी.
रोबोटिक सिस्टम से चलेगा अस्पताल, सेकंडों में पहुंचेगी दवा और सैंपल
रिम्स-2 में ऑटोमेटेड फार्मेसी डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम लगाया जाएगा, जिसमें रोबोटिक आर्म, बारकोड और RFID तकनीक से दवाइयों का वितरण होगा. डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन सीधे सिस्टम से जुड़कर फार्मेसी तक पहुंचेगा, जिससे गलत दवा मिलने की संभावना खत्म हो जाएगी. न्यूमेटिक ट्यूब ट्रांसपोर्ट सिस्टम के जरिए ब्लड सैंपल, दवाइयां और रिपोर्ट कुछ ही सेकंड में वार्ड से लैब और ओटी तक पहुंचेंगी. इसके साथ ही कचरा और लॉन्ड्री के लिए अलग ऑटोमेटेड ट्यूब सिस्टम होगा, जिससे संक्रमण का खतरा बेहद कम होगा. डिजिटल कतार प्रबंधन प्रणाली के तहत ओपीडी में सेल्फ रजिस्ट्रेशन कियोस्क, टोकन मशीन और मल्टीलिंगुअल डिस्प्ले लगेंगे, जिससे लंबी कतारों से राहत मिले
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2800 बेड, 22 मॉड्यूलर ओटी और सुपर स्पेशलिटी कॉलेज, मेडिकल शिक्षा और इलाज का बनेगा बड़ा केंद्र
पूरे प्रोजेक्ट में 2800 बेड की व्यवस्था होगी. पहले चरण में 1400 बेड का अस्पताल बनेगा, जिसमें 1009 जनरल, 298 आईसीयू और 120 इमरजेंसी बेड शामिल होंगे. यहां 22 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, 2 इमरजेंसी ओटी, 1 हाइब्रिड ऑन्कोलॉजी ओटी और 39 माइनर ओटी बनाए जाएंगे. रेडियोलॉजी विभाग में 10 एमआरआई, 10 सीटी स्कैन, 3 पीईटी सीटी और 14 अल्ट्रासाउंड मशीनें होंगी. साथ ही 200 यूजी, 200 पीजी और 200 सुपर स्पेशलिटी सीटों वाला मेडिकल कॉलेज बनेगा, जिसे भविष्य में 250 यूजी सीट तक बढ़ाया जा सकेगा. छात्रों और डॉक्टरों के लिए आधुनिक हॉस्टल और 2000 क्षमता वाला ऑडिटोरियम भी तैयार होगा.
महिलाओं, आदिवासियों और दिव्यांगों के लिए खास डिजाइन, हेल्थकेयर में समावेश का नया मॉडल
रिम्स-2 में 500 वर्ग मीटर में ‘विमेन एंड ट्राइबल हेल्थ सेंटर’ बनाया जाएगा, जहां 24×7 हेल्पडेस्क, काउंसलिंग और रिलेक्सेशन सुविधाएं होंगी. वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर और बच्चों के लिए क्रेच की भी व्यवस्था होगी. महिला शौचालयों की संख्या पुरुषों से दोगुनी रखी जाएगी, जिनमें पैड वेंडिंग मशीन और बेबी चेंजिंग रूम होंगे. दिव्यांगों के लिए पूरा परिसर व्हीलचेयर फ्रेंडली होगा, जिसमें रैंप, टैक्टाइल फ्लोरिंग और जेंडर न्यूट्रल सुविधाएं शामिल होंगी. स्थानीय आदिवासी महिलाओं के लिए 35 कियोस्क बनाकर रोजगार के अवसर भी सृजित किए जाएंगे.
ग्रीन बिल्डिंग के रूप में विकसित होगा पूरा परिसर, सोलर पावर, शुद्ध हवा और पानी रीसाइक्लिंग पर जोर
रिम्स-2 को GRIHA 4 स्टार ग्रीन बिल्डिंग मानकों पर बनाया जाएगा. ऊर्जा बचत के लिए 2500 kWp का सोलर प्लांट लगाया जाएगा. ओटी और आईसीयू में HEPA फिल्टर आधारित अत्याधुनिक HVAC सिस्टम होगा, जो हवा को बार-बार शुद्ध कर संक्रमण रोकने में मदद करेगा. पानी के पुनर्चक्रण के लिए 2880 KLD क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 250 KLD का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा, जिससे पानी का उपयोग फ्लशिंग और बागवानी में किया जाएगा.
हेल्थ सेक्टर में गेमचेंजर साबित होगा ‘रिम्स-2’, झारखंड ही नहीं, पूरे पूर्वी भारत को मिलेगा फायदा
रिम्स-2 के निर्माण के बाद झारखंड को इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी. यह प्रोजेक्ट आधुनिक चिकित्सा, शोध और मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में राज्य को नई पहचान देगा. स्पष्ट है कि रांची में बनने जा रहा यह मेगा हेल्थ प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर सेक्टर का चेहरा बदलने वाला है.




