झारखंड में सियासी हलचल: पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही का कैबिनेट मंत्री को पत्र, इस्तीफा देने या बगावत करने की दी सलाह

राँची: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर से नौकरशाही और मंत्रियों के बीच तनातनी का मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने झारखंड सरकार में ‘नंबर दो’ के कद्दावर कैबिनेट


राँची: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर से नौकरशाही और मंत्रियों के बीच तनातनी का मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने झारखंड सरकार में ‘नंबर दो’ के कद्दावर कैबिनेट मंत्री राधा कृष्ण किशोर (जिन्हें पत्र में किशोर भैया संबोधित किया गया है) को एक पत्र लिखा है. 19 जुलाई को जारी इस पत्र में शाही ने राज्य की नौकरशाही पर हावी होने और मंत्रियों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है.

नौकरशाही के आगे मंत्री की लाचारी ने विपक्ष को भी कचोटा

भानु प्रताप शाही ने अपने पत्र की शुरुआत मीडिया में आई खबरों का हवाला देते उन्होंने लिखा कि आज सुबह अखबारों में मंत्री जी की ‘चिर-परिचित’ पीड़ा को पढ़कर वे काफी आहत हुए हैं. उन्होंने तंज कसते हुए और सहानुभूति जताते हुए लिखा, झारखंड सरकार में ‘नंबर दो’ के कद्दावर मंत्री होने के बावजूद, राज्य की नौकरशाही के सामने आप जिस तरह लाचार, बेबस और असहाय दिख रहे हैं, उसने मेरे जैसे विपक्ष के नेता को भी अंदर से कचोट कर रख दिया है. उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए आगे लिखा सच्चाई तो यह है कि आपकी अपनी ही कांग्रेस और गठबंधन की इस सरकार को आपके जैसे स्वाभिमानी, नीतिवान और बुजुर्ग राजनेता की कोई जरूरत ही नहीं रह गई है. वर्तमान सत्ता को ‘अनुभवी मार्गदर्शकों’ की नहीं, बल्कि जी-हुजुरी करने वालों की दरकार है.

इस्तीफा देने या बगावत करने की दी सलाह

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि पर्दे के पीछे एक पूरी पटकथा लिखी जा रही है, जिसका मकसद मंत्री को रोज-रोज अपमानित कर घर बिठाना या बाहर का रास्ता दिखाना है. पलामू की माटी का हवाला देते हुए उन्होंने मंत्री को एक छोटे भाई के नाते सलाह दी.

शाही ने लिखा कि इस तरह अपमानजनक बर्खास्तगी का इंतजार करने से बेहतर होगा कि वे अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकें. उन्होंने सलाह दी कि मंत्री अपना इस्तीफा सरकार के मुंह पर दे मारें, ताकि पलामू का और उनका खुद का राजनीतिक स्वाभिमान बच सके. उन्होंने कहा कि नौकरशाही के आगे पलामू का कोई नेता इतना लाचार दिखे, यह पलामू की जनता के लिए असहनीय है. पत्र के अंत में भानु प्रताप शाही ने कांग्रेस पार्टी पर भी चुटकी ली और कहा कि मंत्री जी कांग्रेस की ‘सहनशीलता’ की पाठशाला के पुराने छात्र हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मंत्री उनकी इस सलाह को अन्यथा नहीं लेंगे और अपने स्वाभिमान को सर्वोपरि रखते हुए जल्द ही कोई साहसिक और बड़ा निर्णय लेंगे.

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