रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा घोटाले में सीआईडी की टीम को एक और बड़ी सफलता मिली है। JPSC पेपर लीक के तार अब बिहार के भोजपुर जिले से जुड़ते नजर आ रहे हैं। सीआईडी ने देश की राजधानी दिल्ली से चरपोखरी थाना क्षेत्र के पसौर गांव निवासी मिथिलेश सिंह (पिता- दिवंगत ललित किशोर सिंह) को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि मिथिलेश सिंह इस पूरे सिविल सेवा परीक्षा घोटाले की एक बेहद अहम और मजबूत कड़ी था।
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आयोग से ही निकलवा लेता था कॉपियां
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी मिथिलेश सिंह उर्फ आरके की पहुंच इतनी गहरी थी कि वह JPSC आयोग के कार्यालय से अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं (कॉपियां) तक निकलवा लेता था। इसके बाद वह पैसों का लेन-देन कर अभ्यर्थियों से कॉपियां लिखवाता था। इस काम के एवज में वह उम्मीदवारों से लाखों रुपये की मोटी रकम वसूलता था।
4 बार जेल जा चुका है शातिर मिथिलेश
मामले में पहले से गिरफ्तार अन्य आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिथिलेश सिंह का नाम सामने आया था। मिथिलेश अपने बेटे के नाम पर ‘आईसीएन इंडिया’ (ICN India) नामक परीक्षा कराने वाली संस्था का संचालन करता था, हालांकि वह खुद कागजों में इसके निदेशक मंडल (Board of Directors) में शामिल नहीं रहता था। मिथिलेश पहले भी बिहार, राजस्थान, पंजाब और तेलंगाना में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के मामलों में शामिल रहा है और इससे पहले 4 बार जेल जा चुका है।
24 अभ्यर्थियों से सेटिंग, 1.10 करोड़ की वसूली
सीआईडी जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कुल 24 अभ्यर्थियों को पास कराने की सेटिंग की थी। इनमें से 11 अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 1 करोड़ 10 लाख रुपये ऐंठे गए थे। मिथिलेश की गिरफ्तारी के बाद झारखंड पुलिस और सीआईडी की टीम उसे लेकर उसके पैतृक गांव पसौर भी पहुंची थी। गांव के लोगों का कहना है कि मिथिलेश कभी-कभार ही गांव आता था और किसी को उसकी इन आपराधिक गतिविधियों की भनक तक नहीं थी। उसकी गिरफ्तारी के बाद से गांव में सन्नाटा है।








