नई दिल्ली: GST काउंसिल की बैठक में झारखंड सरकार ने कोयले को GST के दायरे से बाहर करने और उस पर VAT लगाने की अनुमति देने की मांग की। साथ ही नियमों में किये गये बदलाव से राज्य पर पड़े 22000 करोड़ के अतिरिक्त बोझ का मामला उठाया। राज्य सरकार ने अपने पुराने 1.36 लाख करोड़ रुपये की भी मांग उठायी।
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आठ अक्टूबर को हुए GST काउंसिल की बैठक में वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने झारखंड का पक्षा रखा। उन्होंने कोयले को GST के दायरे में रखने की वजह से राज्य को होने वाले नुकसान की चर्चा की। साथ ही कोयले को GST के दायर से बाहर कर उसपर VAT लगाने की अनुमति की मांग की। उन्होंने कहा कि GST से पहले कोयला वैट के दायरे में था। उस वक्त राज्य में कोयला खनन के बाद उसे बेचने पर राज्य के 5% की दर से राजस्व मिलता था। लेकिन GST लागू होने से राज्य को कोयले पर वैट के रूप में मिलने वाली राशि नहीं मिल रही है. इससे राज्य को नुकसान हो रहा है।
GST में खपत वाले राज्य को टैक्स का लाभ देने का प्रावधान है। इसके तहत झारखंड से कोयला खनन के बाद उसे बिजली उत्पादन के लिए विभिन्न राज्यों के भेजा जाता है। इससे कोयले पर GST का लाभ उन राज्यों को मिलता है, जिन राज्यों में इसे बिजली उत्पादन में खर्च किया जाता है। लेकिन खनन का दुष्प्रभाव झारखंड को झेलना पड़ता है।
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कोयला खनन से राज्य का पर्यावरण और वहां रहने वाली आबादी प्रभावित होती है। इसलिए कोयले को GST के दायरे से बाहर लाकर VAT लगाने की अनुमति दी जाये। इससे झारखंड सहित कोयला उत्पादक राज्यों को लाभ होगा। साथ ही कोयला पर लगने वाला टैक्स 18% से कम होकर 5% हो जायेगा। इससे बिजली उत्पादन की लागत में कमी आयेगी और बिजली सस्ती होगी।
वित्त मंत्री ने GST काउंसिल की बैठक में केंद्र सरकार द्वारा नियमों में किये गये बदलाव से राज्य पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ की चर्ची क। उन्होंने कहा कि GST दरों में किये गये संशोधन की वजह से राज्य को सालाना 4000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
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GST में क्षतिपूर्ती भरपाई बंद करने से राज्य को सालाना करीब 2500 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा मनरेगा के बदले VB-G-RAM-G लागू करने से भी राज्य सरकार पर आर्थित बोझ पड़ रहा है। मनरेगा में केंद्र सरकार 90% राशि देती थी। जबकि VB-G-RAM-G में केंद्र सरकार सिर्फ 40% राशि ही दे रही है। इससे भी राज्य पर सालाना 4000 करोड़ का बोझ बढ़ा है।
केंद्र सरकार द्वारा MMDR Act में किये गये संशोधन की वजह से राज्य को सालाना 1400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वित्त मंत्री ने बैठक में पुराने 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाये का मामला उठाया और उसके भुगतान की मांग की।
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