रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में डूमरी की तत्कालीन बीडीओ अन्वेष के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और एफआईआर को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। बीडीओ अन्वेष पर अपने प्रखंड में कार्यरत पंचायत सचिव सुखलाल महतो को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी अधीनस्थ कर्मचारी को केवल तुम-ताम या मेरे-तेरे कहकर संबोधित करना आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं माना जा सकतार्।
बीडीओ पर आरोप अक्सर करती थीं दुर्व्यवहार
यह आदेश झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की कोर्ट ने ने डूमरी थाना में दर्ज कांड संख्या 70/2025 से जुड़े मामले में बीडीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। मृतक पंचायत सचिव सुखलाल महतो के परिजनों ने आरोप लगाया था कि बीडीओ उनके साथ अक्सर दुर्व्यवहार करती थीं और बात-बात पर तुम-ताम और तेरे-मेरे जैसे शब्दों का प्रयोग कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थीं जिससे तंग आकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया. इसके बाद बीडीओ के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
FIR रद्द होने पर हाईकोर्ट का खटखटाया था दरवाजा
BDO ने इस एफआईआर को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई में अदालत ने पाया कि आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी का व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे मृतक के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता न बचे लेकिन इस मामले में ऐसा कोई निरंतर आचरण दिखाई नहीं देता।
साबित नहीं हो सके लगाए गए आरोप
अगर एफआईआर में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए तब भी तुम-ताम या तेरे-मेर कहना किसी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने की श्रेणी में नहीं आता। यह सामान्य टिप्पणी हो सकती है लेकिन उकसावा नहीं।अदालत ने राज्य सरकार के जवाबी हलफनामे का संज्ञान लेते हुए यह भी नोट किया कि जांच के दौरान गवाहों के बयानों से बीडीओ द्वारा ऐसे अपशब्दों के प्रयोग की बात साबित भी नहीं हुई थी।




