साहेबगंज के 9 स्कूलों में आर्सेनिक फिल्टर लगे, 3 हजार छात्रों को स्वच्छ पानी

झारखंड के साहेबगंज जिले के नौ स्कूलों में अब 3,000 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
साहेबगंज

रांची : झारखंड के साहेबगंज जिले के नौ स्कूलों में अब 3,000 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा ने आशा एंड सज्जन अग्रवाल फाउंडेशन के सहयोग से इन विद्यालयों में पांच-स्तरीय आर्सेनिक निष्कासन फिल्टर स्थापित किए हैं। इन स्कूलों में पहले मटमैले पानी की समस्या थी। यूएचएस श्रीरामचौकी की शिक्षिका अनिता कुमारी के अनुसार, पानी का रंग गीली मिट्टी जैसा दिखाई देता था और इसे पीने के बाद बच्चे अक्सर लंबे समय तक पेट दर्द की शिकायत करते थे। हालांकि, गांव के लोग लंबे समय तक इन समस्याओं के पीछे पानी की गुणवत्ता को कारण नहीं समझ पाए।

Read More : रांची में आजसू का लोकभवन मार्च, JPSC-JSSC मामले की CBI जांच की मांग

साहेबगंज के भूजल में आर्सेनिक की चुनौती

साहेबगंज झारखंड का एकमात्र ऐसा जिला है, जहां से गंगा नदी बहती है। इसके कारण जिले के भूजल पर नदी का गहरा प्रभाव पड़ा है। दशकों पहले भूजल में धीरे-धीरे आर्सेनिक की मौजूदगी बढ़ी, जो समय के साथ एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बन गई। आर्सेनिक के लंबे समय तक संपर्क में रहने के प्रभाव धीरे-धीरे सामने आते हैं। ऐसे में लोगों के लिए बार-बार होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले पानी से जोड़ पाना कठिन हो जाता है।

बीआईटी मेसरा ने आशा एंड सज्जन अग्रवाल फाउंडेशन के सहयोग से राजकीय मध्य विद्यालय फुदकीपुर, स्वामी विवेकानंद उच्च विद्यालय श्रीधर, यूएमएस सरपंच टोला, एम.एस. किशन प्रसाद, यूपीजी राजकीय मध्य विद्यालय समदा, यूपीजी पीएस शांतिनगर घोघी, यूएचएस श्रीरामचौकी, पीएम श्री नगरपालिका कन्या विद्यालय और एक सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में पांच-स्तरीय आर्सेनिक निष्कासन फिल्टर लगाए हैं। इन विद्यालयों में पहले जिस पानी को विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम बताया गया था, वहां अब छात्रों और शिक्षकों को लगातार स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।

रांची से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंची बीआईटी मेसरा की टीम

इस पहल के तहत बीआईटी मेसरा की टीम ने रांची से झारखंड के प्रभावित क्षेत्रों तक सड़क मार्ग से करीब 10 घंटे की यात्रा की। इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड प्लानिंग के एसोसिएट डीन डॉ. कीर्ति अभिषेक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग के डॉ. विशाल एच. शाह और शोधार्थी आकाश ने इन क्षेत्रों का दौरा किया। बीआईटी मेसरा के एक पूर्व छात्र द्वारा स्थापित आशा एंड सज्जन अग्रवाल फाउंडेशन के सहयोग से टीम ने जिले के अधिक प्रभावित क्षेत्रों में इन ब्लू फिल्टरों की स्थापना की।

फिल्टर लगाने के बाद टीम ने मौके पर पानी की जांच भी की। परीक्षण के दौरान फिल्टरों के प्रभावी ढंग से काम करने की पुष्टि हुई। इसका असर केवल जांच रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यालयों में भी बदलाव दिखाई दिया। यूएचएस श्रीरामचौकी की शिक्षिका अनिता कुमारी ने कहा, “ब्लू फिल्टर लगने के बाद अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही। पानी बहुत अच्छा हो गया है और सभी इसका उपयोग कर रहे हैं।” पीएम श्री नगरपालिका कन्या विद्यालय के विज्ञान शिक्षक अनिकेत कुमार ने भी फिल्टर लगने के बाद पानी की जांच की। उन्होंने कहा, “कार्बोनेट तत्व पूरी तरह से खत्म हो गया है।”

हजारों विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था

बीआईटी मेसरा की इस पहल से साहेबगंज के हजारों विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। संस्थान के अनुसार, यह पहल रांची स्थित परिसर से आगे बढ़कर झारखंड के जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियों के समाधान की दिशा में उसकी सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वर्ष 1955 से बीआईटी मेसरा इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। इस तरह की पहल से यह भी सामने आता है कि अनुसंधान, तकनीकी विशेषज्ञता और संस्थागत सहयोग के माध्यम से झारखंड की स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *