हेमंत सोरेन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, झारखंड की छात्रवृत्ति राशि बढ़ाने की मांग

सीएम हेमंत सोरेन ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर राज्य के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति मद में मिलने वाली केंद्रीय सहायता बढ़ाने की मांग की है।

रांची : सीएम हेमंत सोरेन ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर राज्य के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति मद में मिलने वाली केंद्रीय सहायता बढ़ाने की मांग की है। सीएम ने पत्र में वर्ष 2021-22 के बाद अल्पसंख्यक छात्रों के लिए केंद्र सरकार से राशि नहीं मिलने का उल्लेख करते हुए छात्रवृत्ति योजना को दोबारा शुरू करने का आग्रह किया है। सीएम ने कहा कि झारखंड में शिक्षा को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, ताकि कमजोर और वंचित वर्ग के लोग मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि राज्य में भौगोलिक कठिनाइयों, सीमित संसाधनों और वंचित समुदायों की संख्या अधिक होने के कारण छात्रों को शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में केंद्र सरकार का सहयोग आवश्यक है।

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प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए कम मिली राशि

सीएम ने पत्र में छात्रवृत्ति के लिए राज्य की ओर से की गई मांग और केंद्र से प्राप्त राशि का भी विवरण दिया है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए झारखंड ने 66.14 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार से केवल 12.61 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 45.91 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले सिर्फ 3.95 करोड़ रुपये मिले।

इसी तरह, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए वर्ष 2024-25 में राज्य ने 353.21 करोड़ रुपये की मांग की थी, जबकि केंद्र से केवल 33.57 करोड़ रुपये मिले। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 370.87 करोड़ रुपये की मांग के बदले राज्य को 58.22 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई। सीएम ने पत्र में कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए केंद्र सरकार की ओर से झारखंड को क्रमशः 23.78 करोड़ रुपये और 32.70 करोड़ रुपये नेशनल एलोकेशन के रूप में स्वीकृत किए गए थे। उन्होंने इस राशि को झारखंड जैसे राज्य की जरूरतों की तुलना में कम बताते हुए इसमें बढ़ोतरी की मांग की।

एससी-एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति बढ़ाने का आग्रह

हेमंत सोरेन ने पत्र में झारखंड के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि प्री मैट्रिक दिवाकालीन छात्रों के लिए प्रतिवर्ष 3,000 रुपये की छात्रवृत्ति निर्धारित है। सीएम के अनुसार, केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति मद में झारखंड के लिए कोई राशि विमुक्त नहीं की है।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लिए 200 करोड़ रुपये विमुक्त किए गए थे। हालांकि, पत्र के अनुसार यह राशि वास्तव में वित्तीय वर्ष 2022-23 के एरियर से संबंधित थी और वित्तीय वर्ष 2023-24 की 42 प्रतिशत पहली किस्त के रूप में दी गई थी। सीएम ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 की शेष 58 प्रतिशत राशि के साथ वर्ष 2024-25 और 2025-26 का पूरा केंद्रीय अंश झारखंड के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति मद में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान राज्य को कोई राशि नहीं मिली।

पत्र में कहा गया है कि प्री मैट्रिक स्तर पर अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की राशि अलग-अलग निर्धारित है। यह क्रमशः 3,000 रुपये, 3,500 रुपये और 4,000 रुपये प्रति छात्र है। CM ने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति दर अन्य वर्गों की तुलना में कम है। उन्होंने इस राशि में आवश्यक बढ़ोतरी करने का आग्रह किया है।

अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना फिर शुरू करने की मांग

CM हेमंत सोरेन ने पत्र में कहा कि झारखंड में अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी 23.29 प्रतिशत है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2021-22 के बाद से केंद्र सरकार की ओर से संचालित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के तहत राज्य को कोई राशि नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने से अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक उत्थान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सीएम ने पीएम से इस योजना को दोबारा शुरू करने का आग्रह किया। सीएम ने पत्र में कहा कि झारखंड सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रही है। उन्होंने छात्रों को पर्याप्त शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग और छात्रवृत्ति राशि में बढ़ोतरी की मांग की।

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