जस्टिस संजय करोल ने कहा- जज भगवान नहीं, फैसलों में विनम्रता जरूरी

सुप्रीम कोर्ट से विदाई के मौके पर जस्टिस संजय करोल ने न्याय की सीमाओं और संवेदनशीलता पर बात करते हुए कहा कि फैसलों में विनम्रता जरूरी है।

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नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय करोल को शनिवार को उनके कार्यालय के अंतिम दिन भावुक विदाई दी गई। विदाई समारोह में उन्होंने न्यायाधीश के रूप में अपनी जिम्मेदारियों, न्याय की सीमाओं और अदालत में आने वाले लोगों के प्रति संवेदनशीलता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि “हम, जज, भगवान नहीं हैं” और हर फैसला पूरी तरह सही हो, यह संभव नहीं है।

जस्टिस करोल ने कहा कि न्याय करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात याचिका के पीछे मौजूद इंसान को देखना है। उनके मुताबिक, एक याचिका किसी मामले के तथ्य तो सामने रख सकती है, लेकिन यह नहीं बता सकती कि संबंधित व्यक्ति पहले ही क्या खो चुका है और अदालत से क्या हासिल करने की उम्मीद कर रहा है। इसलिए न्यायिक फैसले लेते समय एक विशेष स्तर की विनम्रता आवश्यक है।

‘सिर्फ याचिका नहीं, उसके पीछे के इंसान को देखें’

जस्टिस करोल ने कहा कि न्यायाधीशों को केवल कागजों और तथ्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उस व्यक्ति की परिस्थितियों को भी समझने की कोशिश करनी चाहिए जो न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचता है। उन्होंने कोर्टरूम में बोले गए तर्कों के अलावा वहां मौजूद मौन को समझने की जरूरत पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का वास्तविक महत्व उस आम नागरिक के विश्वास में है, जो यह उम्मीद लेकर अदालत के दरवाजे तक पहुंचता है कि कोई उसकी बात सुनेगा। उनके अनुसार, न्याय की रक्षा करना और अदालत के सामने खड़े प्रत्येक व्यक्ति को यह एहसास दिलाना कि उसे देखा और सुना जा रहा है, न्यायाधीश का महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

करीब चार दशक की कानूनी यात्रा को किया याद

जस्टिस संजय करोल ने कानून के क्षेत्र में अपनी करीब चार दशक लंबी यात्रा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अदालत उनके लिए केवल काम करने की जगह नहीं रही, बल्कि खुद से भी बड़ी और महत्वपूर्ण किसी चीज तक पहुंचने का माध्यम रही है।

उन्होंने अपनी यात्रा को अकेले की उपलब्धि मानने से इनकार करते हुए कहा कि अदालत ने हमेशा उनका साथ दिया। उनके शब्दों में, इस संस्थान ने उन्हें बहुत कुछ दिया और उनकी पेशेवर यात्रा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

CJI सूर्यकांत ने जस्टिस करोल के कार्यकाल को सराहा

विदाई समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जस्टिस संजय करोल के कार्यकाल की सराहना की। उन्होंने कहा कि जस्टिस करोल का करियर कानून के प्रति गंभीरता, लोगों के प्रति संवेदनशीलता और अपने पद के प्रति गहरे सम्मान से पहचाना जाता है।

CJI ने कहा कि बार जस्टिस करोल को केवल उनके फैसलों के लिए नहीं, बल्कि उनके धैर्य, शिष्टाचार, दूसरों को सुनने की इच्छा और कोर्टरूम में उनके व्यवहार से पैदा होने वाले भरोसे के लिए भी याद करेगा।

तुषार मेहता ने बताया संवेदनशील न्यायाधीश

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस करोल को संवेदनशील न्यायाधीश बताया। उन्होंने कहा कि किसी मामले को खारिज करते समय या प्रतिकूल फैसला सुनाते हुए भी जस्टिस करोल उस व्यक्ति को देखते थे जो मुकदमा हार रहा है और उसके प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते थे।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने भी जस्टिस करोल से जुड़ी याद साझा की। उन्होंने बताया कि जस्टिस करोल अक्सर अदालत में पूछते थे कि “अदालत में सबसे छोटा कौन है?” इसके जरिए वह युवा वकीलों को भी मामलों में अपनी भूमिका निभाने और सीखने का अवसर देते थे।

6 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट में हुए थे पदोन्नत

जस्टिस संजय करोल को 6 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उनके कार्यालय के अंतिम दिन बैठी विदाई पीठ में CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस करोल, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल रहे।

विदाई समारोह में बार के वरिष्ठ सदस्यों सहित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष प्रदीप राय ने भी जस्टिस करोल को शुभकामनाएं दीं।

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