गुवाहाटी: असम ने पशुपालन और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। असम वेटेरिनरी एंड फिशरी यूनिवर्सिटी की लैब में शनिवार को लखीमी नस्ल की गाय के भ्रूण से IVF तकनीक के जरिए एक मादा बछिया का जन्म हुआ। इसे राज्य के पशुधन और डेयरी क्षेत्र के साथ-साथ देसी नस्लों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गुवाहाटी स्थित असम वेटेरिनरी एंड फिशरी यूनिवर्सिटी ने राज्य की देसी मवेशी नस्लों के संरक्षण और विकास के लिए यह पहल की है। जिस लैब में IVF प्रक्रिया के जरिए बछिया का जन्म हुआ, उसे राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) के तहत वित्तीय सहायता से तैयार किया गया था।
शुद्ध लखीमी नस्ल के भ्रूण से हुआ जन्म
मादा बछिया को शुद्ध लखीमी नस्ल के मवेशी के भ्रूण का इस्तेमाल करते हुए इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया। इस उपलब्धि को असम में पशुधन सुधार और आधुनिक प्रजनन तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस उपलब्धि की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की और डॉक्टरों एवं वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने इसे असम के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सभ्यता, संस्कृति और सृजन का सुंदर संगम है।
पशुधन और डेयरी क्षेत्र के लिए नए अवसर
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम की लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली IVF मादा बछिया का जन्म राज्य के पशुधन और डेयरी क्षेत्र के लिए नए अवसर खोलता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीक से देसी नस्लों के संरक्षण, बीमारी नियंत्रण और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसका सीधा लाभ किसानों की आय बढ़ाने में भी हो सकता है।
लखीमी बछिया के सफल IVF जन्म को असम के डेयरी क्षेत्र में एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। आधुनिक प्रजनन तकनीक और देसी नस्लों के संरक्षण के इस मेल से आने वाले समय में राज्य के पशुपालन क्षेत्र को और मजबूत करने की उम्मीद है।



