प्रभु जगन्नाथ,बलभद्र और माता सुभद्रा की पूजा-अर्चना में जुटे भक्त

रांची। लातेहार जिलेके कामता गढ़ टोरी में रथयात्रा को लेकर अहले सुबह सही भक्ताें का सैलाव पूजा-अर्चना और भगवान के दर्शन करने को लेकर उमड़ पड़ा था। जैसे-जैसे सूर्य का तापमान बढ़ रहा था । वैसे-वैसे भक्तों की भीड़ बढ़ने की वजह से भक्त कतारबद्ध

रांची। लातेहार जिलेके कामता गढ़ टोरी में रथयात्रा को लेकर अहले सुबह सही भक्ताें का सैलाव पूजा-अर्चना और भगवान के दर्शन करने को लेकर उमड़ पड़ा था। जैसे-जैसे सूर्य का तापमान बढ़ रहा था । वैसे-वैसे भक्तों की भीड़ बढ़ने की वजह से भक्त कतारबद्ध होकर भगवान के दर्शन कर आपने आप को धन्यमान रहे थे। वहीं प्रभु जगन्नाथ शाम पांच बजे रथा रूढ़ होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे जहां भगवान के रथ खिचनें के लिए लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है।

मंदिर का इतिहास दो सौ वर्ष पूराना है

मंदिर के इतिहास की बात करें तो लगभग 200 वर्षों का पूराना इतिहास रहा है। जो टोरी इस्टेट के राजा लाल जगधात्रीनाथ से जुड़ा हुआ है। इस ऐतिहासिक रथयात्रा की शुरुआत टोरी इस्टेट के तत्कालीन राजाओं वर्ष 1833 में गई थी।

परम्पराओं की बात करें तो अन्य जगन्नाथ मंदिरों की तरह,यहां भी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को रथ पर आरूढ़ कर धूमधाम से मौसीबाड़ी ले जाया जाता है। जहां भगवान पूरे 10 दिनों तक मौसीबाड़ी में रहते हैं और आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को मुख्य मंदिर लौट आते हैं। इस उत्सव में क्षेत्र के अलावे बाहर जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और रथ को खिंचकर भगवान जगन्नाथ से खुशहाल जीवन की कामना करते हैं।

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