रांची: JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच ने शुक्रवार को रांची में प्रेस वार्ता कर झारखंड की भर्ती प्रक्रिया और सरकार की न्यायालय में पैरवी को लेकर गंभीर सवाल उठाए। मंच के प्रमुख एवं छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने आरोप लगाया कि सरकार ने भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में अदालत के सामने अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा। उन्होंने चेतावनी दी कि 15 सितंबर को हाईकोर्ट में छात्रों के हित में सरकार की मजबूत पैरवी नहीं हुई तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि झारखंड गठन के 26 साल बाद भी भर्ती व्यवस्था भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से प्रभावित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र आंदोलन अब किसी भी कीमत पर समझौते की राह पर नहीं जाएगा।
उन्होंने बताया कि छात्र आंदोलन की शुरुआत 5 जुलाई से हुई थी, जो 25 जुलाई से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह में बदल गया। उनके अनुसार, आंदोलन के दबाव में सरकार को 22 परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, छह परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ीं और 17 मामलों में जांच बैठानी पड़ी। हालांकि, दो दिन बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, FSO, CDPO और JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के फैसले पर रोक लग गई।
CID रिपोर्ट को अदालत में मजबूती से रखने पर सवाल
देवेंद्रनाथ महतो ने सवाल उठाया कि सरकार ने अदालत में CID की रिपोर्ट को मजबूती से क्यों नहीं रखा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि मामले की पहली सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता अदालत में क्यों नहीं पहुंचे और सरकार ने अपने फैसले का पर्याप्त बचाव क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी निर्दोष छात्र की नौकरी छीनना नहीं है। सरकार को यह तय करना चाहिए कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष। दोषियों पर कार्रवाई के साथ पूरे भर्ती तंत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि यदि सरकार अपने फैसले के आधार और CID जांच रिपोर्ट को प्रभावी तरीके से अदालत के सामने रखती, तो परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर रोक की स्थिति नहीं बनती।
24 अगस्त से नेमरा से निकलेगी भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा
मंच ने आंदोलन के दूसरे चरण की घोषणा करते हुए 24 अगस्त से दिशोम गुरु पद्म भूषण शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। यह यात्रा झारखंड के सभी 24 जिलों से होकर गुजरेगी। देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि भविष्य में पारदर्शी और धांधली मुक्त परीक्षा व्यवस्था की स्थायी गारंटी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि मंत्री के बयानों और CID जांच के आधार पर अब तक 45 परीक्षाओं पर कार्रवाई हुई है। ऐसे में सरकार को भर्ती व्यवस्था में स्थायी सुधार लागू करना चाहिए।
15 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी
मंच ने कहा कि 15 सितंबर को हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। देवेंद्रनाथ महतो ने चेतावनी दी कि यदि उस दिन सरकार ने अदालत में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा तो बड़ी संख्या में छात्र मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलन में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी। जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम जैसे बड़े आंदोलन भी किए जाएंगे।
PGT समेत कई भर्तियों पर कार्रवाई की मांग
देवेंद्रनाथ महतो ने आरोप लगाया कि PGT भर्ती मामले को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी गंभीर शिकायतें हैं, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने मांग की कि विवादित भर्ती प्रक्रियाओं के तहत नियुक्त और वर्तमान में प्रशिक्षण ले रहे अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण पर भी रोक लगाई जाए, ताकि जांच पूरी होने तक किसी तरह की जल्दबाजी न हो।
सरकार ने भरोसा मांगा, अदालत में पैरवी कमजोर: राजेश प्रसाद
प्रेस वार्ता में मंच के प्रतिनिधि राजेश प्रसाद ने कहा कि छात्र आंदोलन के बाद कई मामलों में गिरफ्तारियां हुईं और CGL प्रकरण राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि छात्रों को उम्मीद थी कि सरकार भर्ती सुधार के मुद्दे पर उनके साथ खड़ी होगी। राजेश प्रसाद के अनुसार, सरकार ने छात्रों से भरोसा रखने को कहा था और छात्रों ने उस भरोसे पर आंदोलन समाप्त किया। लेकिन इसके बाद जब JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षाओं का मामला अदालत पहुंचा, तब पहले दिन महाधिवक्ता मौजूद नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दिन सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने केवल जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जबकि सरकार महत्वपूर्ण तथ्यों और CID जांच के आधार को अदालत के सामने रख सकती थी। उन्होंने दावा किया कि CGL मामले में भी सरकार की ओर से प्रभावी ढंग से पक्ष नहीं रखा गया।
राजेश प्रसाद ने कहा कि यदि सरकार अदालत में अपने फैसलों के ठोस आधार प्रस्तुत करती, तो रद्द की गई परीक्षाओं पर रोक लगाने जैसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने कहा कि मंच फिलहाल यह नहीं मानता कि सरकार ने आंदोलन खत्म कराने के लिए कोई साजिश रची थी, लेकिन यदि केवल विरोध शांत कराने के लिए फैसले लिए गए और अदालत में उनका बचाव नहीं किया गया, तो यह छात्रों के साथ विश्वासघात होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कार्मिक विभाग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि परीक्षाओं पर कार्रवाई CID जांच के आधार पर की गई थी।








