पलामू : झारखंड के पलामू जिले से शिक्षा विभाग से जुड़ा एक संवेदनशील मामला सामने आया है। एक गर्भवती शिक्षिका के पति ने आरोप लगाया है कि समय पर मातृत्व अवकाश स्वीकृत नहीं होने के कारण उनकी पत्नी को लगातार विद्यालय आना-जाना पड़ा, जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अवकाश स्वीकृत करने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। हालांकि, जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए आवेदन में तकनीकी त्रुटि को देरी की वजह बताया है।
Read More : डूरंड कप 2026 : मोरहाबादी में आज से रूट डायवर्जन, जानें पार्किंग व्यवस्था
मिली जानकारी के अनुसार हजारीबाग जिला पुलिस विभाग में कार्यरत मुकेश कुमार तिवारी की पत्नी भारती पांडे पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में प्लस-टू शिक्षिका हैं। परिजनों के मुताबिक, भारती पांडे नौ माह की गर्भवती थीं और चिकित्सकों ने उनकी संभावित प्रसव तिथि 4 अगस्त निर्धारित की थी।
समय पर अवकाश नहीं मिलने का आरोप
पीड़ित पति मुकेश कुमार तिवारी का आरोप है कि चिकित्सकीय सलाह के आधार पर 3 जुलाई को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन दिया गया था। इसके बावजूद समय पर अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया, जिसके कारण उनकी पत्नी को नियमित रूप से विद्यालय आना-जाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि अवकाश स्वीकृत करने के एवज में रिश्वत की मांग भी की गई। उनका कहना है कि यदि समय पर मातृत्व अवकाश मिल जाता, तो संभवतः इस दुखद घटना से बचा जा सकता था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
डीईओ ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने रिश्वत मांगने के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि शिक्षिका के अवकाश आवेदन में तकनीकी त्रुटि थी, जिसके कारण प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग किसी भी स्तर पर रिश्वतखोरी को बढ़ावा नहीं देता और लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
घटना के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अवकाश स्वीकृति में देरी की वास्तविक वजह क्या थी और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।




