रांची: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), रांची में इस बार 250 MBBS सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया के दौरान जाति प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर विशेष सख्ती बरती जाएगी। पूर्व में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर दाखिले की शिकायतों और विवादों को देखते हुए RIMS प्रबंधन ने दस्तावेज सत्यापन की नई व्यवस्था तैयार की है।
नई व्यवस्था के तहत रिजर्व कैटेगरी के छात्रों के दस्तावेजों की गहन जांच दाखिले से पहले की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र को फर्जी या गलत प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षित सीट का लाभ न मिल सके और पूरी प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
फर्जीवाड़े पर रोक के लिए 6 सदस्यीय कमेटी
RIMS प्रबंधन ने जाति प्रमाणपत्र से जुड़े फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए मेडिकल सुपरिटेंडेंट की अध्यक्षता में छह सदस्यीय विशेष कमेटी का गठन किया है।
यह कमेटी MBBS दाखिले के दौरान छात्रों के जाति प्रमाणपत्र और अन्य संबंधित शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच करेगी। दस्तावेजों की शुरुआती जांच में सब कुछ सही पाए जाने पर छात्र को अस्थायी रूप से दाखिला दिया जाएगा।
संबंधित जिले के DC ऑफिस से होगा सत्यापन
प्रारंभिक जांच के बाद भी सत्यापन की प्रक्रिया खत्म नहीं होगी। RIMS प्रशासन संबंधित छात्र के जाति प्रमाणपत्र को उसके गृह जिले के उपायुक्त (DC) कार्यालय में सत्यापन के लिए भेजेगा। जिला प्रशासन की ओर से प्रमाणपत्र की जांच की जाएगी। सत्यापन रिपोर्ट RIMS को प्राप्त होने और दस्तावेज सही पाए जाने के बाद ही छात्र का नामांकन अंतिम रूप से पक्का माना जाएगा।
कैसे होगी पूरी सत्यापन प्रक्रिया?
प्रारंभिक जांच: छह सदस्यीय कमेटी दाखिले के समय जाति प्रमाणपत्र समेत अन्य दस्तावेजों की जांच करेगी।
अस्थायी नामांकन: प्रारंभिक जांच में दस्तावेज सही पाए जाने पर छात्र को अस्थायी रूप से दाखिला दिया जाएगा।
DC ऑफिस सत्यापन: जाति प्रमाणपत्र को संबंधित जिले के उपायुक्त कार्यालय भेजकर उसकी सत्यता की जांच कराई जाएगी।
अंतिम नामांकन: जिला प्रशासन की सकारात्मक सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद ही दाखिले को अंतिम रूप दिया जाएगा।
फर्जी जाति प्रमाणपत्र से दाखिले पर लगेगी रोक
RIMS प्रबंधन की इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य आरक्षित वर्ग की सीटों पर फर्जी दस्तावेज के जरिए दाखिला लेने की किसी भी संभावना को रोकना है। इससे उन छात्रों के हितों की भी रक्षा होगी, जो पात्र होने के बावजूद फर्जी प्रमाणपत्रों के कारण आरक्षण का लाभ नहीं ले पाते।
RIMS के PRO डॉ. शिशिर महतो ने बताया कि पूरी व्यवस्था का मकसद फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर होने वाले गलत दाखिलों को रोकना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छह सदस्यीय कमेटी की प्रारंभिक जांच और संबंधित DC कार्यालय से सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद ही किसी छात्र का MBBS एडमिशन अंतिम रूप से स्वीकार किया जाएगा।




