झारखंड रेरा में लागू हो सकती है बिहार की ऑनलाइन व्यवस्था

रांची। प्रमोटर, बिल्डर, जमीन मालिक, खरीददार, बैंकर्स एवं रियल एस्टेट एजेंट के बीच आए दिन मामले रेरा के पास पहुंचते थे। ऐसी समस्याओं का निदान भी जल्दी नहीं हो पाता। इसका एक कारण, कानून की पर्याप्त जानकारी का न होना है। also read :

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 रांची। प्रमोटर, बिल्डर, जमीन मालिक, खरीददार, बैंकर्स एवं रियल एस्टेट एजेंट के बीच आए दिन मामले रेरा के पास पहुंचते थे। ऐसी समस्याओं का निदान भी जल्दी नहीं हो पाता। इसका एक कारण, कानून की पर्याप्त जानकारी का न होना है।
इसको लेकर  रैडिशन ब्लू में झारखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (झारेरा) की ओर से आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में नियमों के प्रति जागरूकता को लेकर दिन भर कार्यक्रम चला। कार्यशाला का विषय ‘रियल एस्टेट सेक्टर के उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों का संवेदीकरण’ था।
 इसमें रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन और इसके व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा हुई। बिहार रेरा के चेयरमैन विवेक कुमार सिंह ने अपने यहां किए बदलाव और ऑनलाइन की बात कही कि किस तरह ऑनलाइन से पारदर्शिता आई है।
उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में पारदर्शिता और होमबायर्स के हितों की सुरक्षा के लिए प्रोजेक्ट के पूरे लाइफ साइकिल को तकनीक से जोड़ा जा रहा है। प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन से पहले ही ऑनलाइन सेल्फ स्क्रूटनी की व्यवस्था की गई है। इसमें सभी अनिवार्य दस्तावेज जमा होने के बाद ही आवेदन स्वीकार किया जाएगा।
जमीन, नक्शा, फायर एनओसी समेत अन्य जरूरी स्वीकृतियों का ऑनलाइन सत्यापन होगा। साथ ही फाइलों का आवंटन रैंडम तरीके से किया जा रहा है, ताकि किसी तरह की मनमानी की गुंजाइश न रहे। बिहार में यह सिस्टम सफलतापूर्वक काम कर रहा है। इससे काम में काफी पारदर्शिता आई है। उन्होंने ए, बी, सी श्रेणी बताया कि इस श्रेणी में ऑनलाइन फाइल जमा होती है।
उन्होंने कहा कि रेरा के चार प्रमुख स्टेकहोल्डर प्रमोटर, होमबायर, प्राधिकरण और आम जनता हैं। सभी के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जा रहा है। क्वेरी सिस्टम को भी मानकीकृत किया गया है, ताकि अधिकारियों के स्तर पर मनमानी न हो। जरूरत पड़ने पर प्रमोटरों को काउंसिलिंग की सुविधा भी दी जाती है। इस कार्यशाला में बिल्डर-डेवलपर, आर्किटेक्ट सहित अन्य स्टेक होल्डर्स उपस्थित थे।
कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए झारखंड रेरा के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने कहा कि बिहार रेरा बेहतर काम कर रहा है। अलग-अलग राज्यों में इस तरह की वर्कशाप आयोजित की जाती हैं। इसी क्रम में रांची में कार्यक्रम हुआ। बिहार रेरा ने अपने अनुभव और तकनीकी व्यवस्था से जुड़े आइडिया साझा किए हैं।
जरूरत पड़ने पर इनमें से उपयोगी व्यवस्था को झारखंड रेरा में भी लागू किया जाएगा। कार्यक्रम में बिल्डर, प्रमोटर, जमीन मालिक, होमबायर, बैंक और वित्तीय संस्थानों समेत अन्य स्टेक होल्डरों को रेरा में रजिस्ट्रेशन, रेरा अधिनियम के तहत बिल्डर और होम बायर के दायित्व, नियमों का उल्लंघन करने पर बिल्डरों पर लगाए जाने वाले पेनाल्टी और सजा के प्रावधान और फ्लैट खरीदारों के अधिकार की जानकारी दी गई।
कार्यपालक अभियंता चंदन कुमार ने शिकायत दर्ज कराने और उसपर होने वाली सुनवाई सहित अन्य जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जमीन ब्रोकर को भी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। बिना रजिस्ट्रेशन के प्लॉट भी नहीं बेच सकते हैं।
कार्यशाला में प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया गया कि रेरा के माध्यम से उपभोक्ताओं को प्रभावी एवं पारदर्शी होने से रेरा के प्रति विश्वास जगा है। वित्तीय साल 2020-21 में मात्र 30 ममाले दायर किए गए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या 111 हो गई।
इसी तरह 2020-21 में मात्र प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन किए गए थे जबकि यह संख्या इस समय बढ़कर 1192 हो गई। अब घर बैठे रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट की जानकारी पोर्टल पर प्राप्त कर सकते हैं।
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