मधेपुरा : सावन की अंतिम सोमवारी पर मधेपुरा के प्रसिद्ध सिंहेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ी भीड़ को लेकर सामने आई भगदड़ और बैरिकेडिंग टूटने की खबरों पर जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। मधेपुरा के जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने कहा कि मंदिर परिसर में भगदड़ जैसी कोई स्थिति नहीं बनी और लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग भी कहीं से नहीं टूटी। DM के मुताबिक, सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर निर्धारित एसओपी के तहत मुख्य गेट को बीच-बीच में बंद कर भीड़ को व्यवस्थित किया गया। मंदिर के बाहर पर्याप्त जगह होने के कारण श्रद्धालुओं को वहां फैलाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। भीड़ के दौरान कुछ श्रद्धालु डिहाइड्रेशन के कारण अस्वस्थ हुए। उन्हें मंदिर परिसर में बनाए गए मेडिकल कैंप में उपचार दिया गया। इसके अलावा सीढ़ी से पैर फिसलने और बैरिकेडिंग में पैर फंसने से एक-दो श्रद्धालुओं को हल्की चोट लगी, जिनका मौके पर ही इलाज कराया गया।
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DM बोले- नहीं टूटी लोहे की बैरिकेडिंग
जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगाई गई लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि बैरिकेडिंग कहीं से नहीं टूटी है। DM ने बताया कि भीड़ बढ़ने पर प्रशासन ने निर्धारित एसओपी के अनुसार मुख्य प्रवेश द्वार को कुछ समय के लिए बंद किया और श्रद्धालुओं को कतार में व्यवस्थित किया। प्रशासन की टीम लगातार स्थिति पर नजर रख रही थी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए व्यवस्था संभाल रही थी। मधेपुरा के एसपी संदीप सिंह ने भी स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में न तो बैरिकेडिंग टूटी और न ही भगदड़ मची। उन्होंने मीडिया, न्यूज पोर्टल और यूट्यूबर्स से अपील की कि किसी भी खबर को प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। एसपी ने कहा कि बिना सत्यापन भ्रामक खबरें प्रसारित न की जाएं। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर मुख्य गेट को बंद किया जाता है और लोगों को कतार में व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाता है। अंतिम सोमवारी पर भी इसी व्यवस्था के तहत भीड़ को नियंत्रित किया गया।
महिला के सिर में मामूली चोट, पुलिसकर्मी को मोच
एसपी संदीप सिंह के अनुसार, भीड़ के दौरान एक महिला के फिसलने से उसके सिर में सतही चोट आई थी। उसका उपचार कराया गया। इसके अलावा ड्यूटी के दौरान एक पुलिसकर्मी के पैर में मोच आ गई, जिसके बाद उसे भी इलाज के लिए भेजा गया। प्रशासन के अनुसार, घटना में किसी बड़े हादसे की स्थिति नहीं बनी और श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से जलाभिषेक कराने की व्यवस्था जारी रही। एसपी ने बताया कि सिंहेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल कैंप की व्यवस्था पिछले तीन वर्षों से निर्धारित एसओपी के तहत की जा रही है। अंतिम सोमवारी पर भी इन सभी व्यवस्थाओं को सक्रिय रखा गया था। उन्होंने बताया कि मेडिकल कैंप में अस्वस्थ होने वाले श्रद्धालुओं को तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया। प्रशासन और पुलिस की टीम मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भीड़ की स्थिति पर लगातार नजर रखती रही।
आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील
जिलाधिकारी और एसपी ने श्रद्धालुओं और आम लोगों से अपील की है कि सिंहेश्वर मंदिर की व्यवस्था या किसी घटना से जुड़ी जानकारी के लिए केवल प्रशासन और पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी सूचनाओं पर भरोसा करें। अधिकारियों ने कहा कि बिना पुष्टि के अफवाह या भ्रामक सूचना फैलाने से लोगों में अनावश्यक भ्रम और परेशानी पैदा हो सकती है। प्रशासन के अनुसार, अंतिम सोमवारी पर बढ़ी भीड़ को निर्धारित एसओपी के तहत नियंत्रित किया गया और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।




