बिहार की सभी जेलों में लागू होंगे नए नियम, सुरक्षा और बंदियों के पुनर्वास पर सरकार का जोर

पटना : बिहार सरकार ने राज्य की सभी जेलों की व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में पटना स्थित बेऊर केंद्रीय कारा में सामने आई व्यवस्थागत खामियों के बाद कारा एवं सुधार सेवाएं विभाग ने सभी जेल अधीक्षकों के

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पटना : बिहार सरकार ने राज्य की सभी जेलों की व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में पटना स्थित बेऊर केंद्रीय कारा में सामने आई व्यवस्थागत खामियों के बाद कारा एवं सुधार सेवाएं विभाग ने सभी जेल अधीक्षकों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इन निर्देशों का उद्देश्य जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, बंदियों के पुनर्वास को बढ़ावा देना और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

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विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी जेलों में इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

पहली बार अपराध करने वाले बंदियों के लिए अलग वार्ड

नई गाइडलाइन के तहत पहली बार अपराध करने वाले बंदियों और तरुण (युवा) कैदियों को अलग वार्ड में रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि ऐसे बंदियों को कुख्यात अपराधियों के साथ रखने से उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें अलग रखने का फैसला लिया गया है।

इसके साथ ही गंभीर आपराधिक मामलों में बंद कुख्यात अपराधियों को भी सामान्य बंदियों से अलग रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि जेल के भीतर सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखा जा सके।

स्वास्थ्य, शिक्षा और भोजन पर विशेष फोकस

कारा एवं सुधार सेवाएं विभाग ने सभी जेलों में बंदियों को निर्धारित डाइट चार्ट के अनुसार गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वृद्ध, बीमार और गर्भवती महिला बंदियों के लिए विशेष आहार की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

सरकार ने सभी तरुण बंदियों का शत-प्रतिशत शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में नामांकन कराने का निर्देश दिया है। विभाग का मानना है कि शिक्षा के जरिए बंदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा प्रत्येक जेल में हर महीने स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सभी बंदियों की नियमित स्वास्थ्य जांच होगी। जेल रेडियो के माध्यम से स्वास्थ्य, स्वच्छता और जागरूकता संबंधी कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे। जेल परिसर, बंदी वार्ड, रसोईघर और शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।

ग्रीन कैंपस, ऊर्जा बचत और प्रशासनिक सख्ती

नई पहल के तहत बिहार की जेलों को पर्यावरण अनुकूल बनाने की योजना तैयार की गई है। जेल परिसरों में फूलों, औषधीय पौधों, छोटे पेड़ों और मसालों की खेती करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बंदियों को जेल कर्मशालाओं से जोड़कर उपयोगी उत्पाद तैयार कराने और रोजगारपरक कौशल विकसित करने पर भी बल दिया गया है।

विभाग ने सभी जेलों का विद्युत लोड ऑडिट कराने, अनावश्यक बिजली उपकरणों के उपयोग पर रोक लगाने और ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। बंदियों की समस्याओं के समाधान के लिए नियमित रूप से बंदी दरबार आयोजित करने को भी कहा गया है।

सरकार ने राज्य की सभी जेलों में प्राइवेट मेस के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यदि किसी जेल में निजी मेस संचालित होने की पुष्टि होती है तो संबंधित जेल अधीक्षक के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा सभी जेल अधीक्षकों को बिना पूर्व अनुमति या सूचना मुख्यालय नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है। विभाग का कहना है कि राज्य की जेलों को अधिक सुरक्षित, अनुशासित और सुधारात्मक संस्थानों के रूप में विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है।

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