कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मदन मित्रा ने पार्टी के बागी खेमे का साथ देने का ऐलान कर दिया। यह गुट विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में सक्रिय है। मदन मित्रा के इस फैसले को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
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टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल मदन मित्रा लंबे समय से पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे हैं। उनके बागी गुट में जाने से पार्टी की अंदरूनी राजनीति को लेकर चल रही चर्चाओं ने फिर जोर पकड़ लिया है।
विधानसभा पहुंचकर किया ऐलान
मंगलवार रात मदन मित्रा अचानक एंटाली के पूर्व विधायक स्वर्णकमल साहा के घर पहुंचे थे। इसके बाद से ही उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई थीं। स्वर्णकमल साहा के बेटे संदीपन साहा एंटाली से विधायक हैं और उन्हें ऋतब्रत बनर्जी गुट का अहम नेता माना जाता है। बुधवार दोपहर मदन मित्रा खुद वाहन चलाकर विधानसभा पहुंचे। वहां ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद उन्होंने इस्तीफे का ऐलान किया और बागी गुट में शामिल हो गए।
जांच एजेंसियों के रडार पर हैं मदन मित्रा
मदन मित्रा पहले से ही नगर भर्ती घोटाले की जांच के दायरे में हैं। पिछले वर्ष अक्टूबर में सीबीआई ने उनके आवास पर करीब पांच घंटे तक तलाशी ली थी। इसके बाद इस वर्ष जून में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी की कार्रवाई कोलकाता और आसपास के सात स्थानों पर हुई थी, जिसमें भवानीपुर और कालीघाट स्थित उनके आवास भी शामिल थे। इसके अलावा दक्षिणेश्वर, संतोषपुर, जोका और बेलेघाटा में भी तलाशी ली गई थी।
इसी मामले में ईडी ने मदन मित्रा की पत्नी और दोनों बेटों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। परिवार को नोटिस मिलने के बाद स्वर्णकमल साहा के घर उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। बताया जा रहा है कि वह मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे तक वहां मौजूद रहे। लंबे समय तक ममता बनर्जी के करीबी रहे मदन मित्रा के इस फैसले से टीएमसी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।




