80वें स्वतंत्रता दिवस पर विधानसभा अध्यक्ष का संबोधन, विकास को बताया चुनौती

रांची : 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर झारखंड विधानसभा परिसर में तिरंगा फहराया गया। इस मौके पर अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में माननीय विधानसभा अध्यक्ष ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया और कहा कि यह अवसर अपने इतिहास को स्मरण करने, वर्तमान

विधानसभा अध्यक्ष

रांची : 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर झारखंड विधानसभा परिसर में तिरंगा फहराया गया। इस मौके पर अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में माननीय विधानसभा अध्यक्ष ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया और कहा कि यह अवसर अपने इतिहास को स्मरण करने, वर्तमान का मूल्यांकन करने और भविष्य के भारत के प्रति अपने दायित्व को दोहराने का है।

स्वतंत्रता सेनानियों और झारखंड के वीरों को किया नमन

अपने संबोधन में उन्होंने महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, मातंगिनी हाजरा और सूर्य सेन जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया। इसके साथ ही उन्होंने झारखंड की माटी के अमर बलिदानियों—बाबा तिलका मांझी, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा के ऐतिहासिक संघर्षों व योगदान को विशेष रूप से नमन किया।

लोकतंत्र, संविधान और असहमति का सम्मान

अध्यक्ष महोदय ने स्पष्ट किया कि 15 अगस्त 1947 को राजनीतिक आजादी मिलने के साथ ही राष्ट्र-निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी भी हमारे कंधों पर आई थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव और मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संविधान की सर्वोच्चता, संस्थाओं की गरिमा, अभिव्यक्ति की आजादी और असहमति के सम्मान पर टिका है। लोकतंत्र में असहमति कमजोरी नहीं, बल्कि इसकी ताकत है।

अधिकारों की समानता और अवसरों की समता पर जोर

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के अगले विकास चरण की सबसे बड़ी चुनौती तेज विकास को अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण बनाना है। उन्होंने कहा कि केवल अधिकारों की समानता काफी नहीं है, बल्कि पिछड़ गए लोगों के लिए अवसरों की समता सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि समाज में किसी व्यक्ति का जन्म उसके भविष्य की सीमा तय न करे।

झारखंड और संथाल क्षेत्र के समावेशी विकास का संकल्प

झारखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाली आर्थिक शक्ति का सीधा लाभ स्थानीय समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचना चाहिए। संथाल क्षेत्र के लिए विकास का अर्थ केवल सड़क और भवन निर्माण नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, स्थानीय रोजगार और भाषा-संस्कृति के सम्मान के साथ आधुनिक अर्थव्यवस्था से जुड़ना है। अंत में उन्होंने एक समृद्ध, समावेशी और समतामूलक भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *