पलामू : झारखंड के पलामू जिले में गर्भवती शिक्षिका के अजन्मे बच्चे की मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षिका भारती पांडेय और उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर अवकाश स्वीकृत नहीं होने के कारण उन्हें लगातार जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई और गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई।
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घटना के बाद जिले के प्राथमिक, मध्य और प्लस-टू स्तर के शिक्षकों में भारी आक्रोश है। रविवार को शिक्षकों ने मेदिनीनगर शहर थाना का घेराव कर DEO संदीप कुमार की बर्खास्तगी और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। हालांकि पुलिस ने कहा कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पति ने लगाया रिश्वत मांगने का आरोप
शिक्षिका के पति मुकेश कुमार तिवारी, जो झारखंड पुलिस में कार्यरत हैं, ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी ने 13 जुलाई से अवकाश के लिए आवेदन दिया था। उनका दावा है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी ने छुट्टी स्वीकृत करने के लिए ₹50 हजार की मांग की और राशि नहीं देने पर अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि समय पर छुट्टी मिल जाती तो उनके बच्चे की जान बच सकती थी।
DEO ने आरोपों से किया इनकार
जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप कुमार ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिक्षिका के आवेदन में मातृत्व अवकाश का उल्लेख नहीं था। उनके अनुसार आवेदन में चाइल्ड केयर लीव (Child Care Leave) मांगी गई थी, जो पहले से जन्मे बच्चों की विशेष परिस्थितियों के लिए होती है। उन्होंने बताया कि 25 जुलाई को शिक्षिका को 185 दिनों का अवकाश स्वीकृत कर दिया गया था।
प्रशासन ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इसमें सिविल सर्जन, नजारत उप समाहर्ता और एक प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी शामिल हैं। जांच टीम ने शिक्षिका के पति से घटना की जानकारी ली है। वहीं, अजन्मे बच्चे का पोस्टमार्टम पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड से कराया गया है।
आंदोलन की चेतावनी
शिक्षक संगठनों ने सोमवार को काला बिल्ला लगाकर कार्य करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि DEO के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई और कार्रवाई नहीं की गई तो राज्यव्यापी आंदोलन और कार्य बहिष्कार किया जाएगा।




