नताशा डॉल पर बर्बरता को लेकर दुनिया भर में छिड़ी बड़ी नस्लीय बहस

बीजिंग: चीन में ‘नताशा डॉल’ नाम से बेहद चर्चित खिलौना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नस्लवाद, ऑनलाइन हिंसा और बच्चों पर पड़ने वाले गंभीर मनोवैज्ञानिक प्रभावों को लेकर तीखी बहस का विषय बन गया है। देखने में सांवले रंग के एक छोटे बच्चे जैसी दिखने वाली इस ‘नताशा डॉल’ के साथ इंटरनेट पर किए जा रहे क्रूर व्यवहार ने सोशल मीडिया यूजर्स को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है।

हाल ही में वायरल हुए कई वीडियो में इस गुड़िया को सुइयों से गोदते, तेज चाकू से बेरहमी से काटते, खींचते, पटकते और पैरों से बुरी तरह कुचलते हुए दिखाया गया है। ऐसे हिंसक वीडियो तेजी से प्रसारित होने के बाद दुनिया भर के लोगों ने इसे गहरे नस्लीय पूर्वाग्रह और अमानवीय मनोरंजन का एक घटिया उदाहरण बताया है। जानकारी के अनुसार, नताशा डॉल वास्तव में एक ‘स्क्वीज टॉय’ (दबाने वाला खिलौना) है, जिसे दबाने पर उसका आकार बदल जाता है और थोड़ी देर बाद वह अपने सामान्य रूप में लौट आता है। यह विशेष फोम या मुलायम रबर से बना है, जिसे शुरुआत में तनाव कम करने (स्ट्रेस बस्टर) के लिए पेश किया गया था, लेकिन सोशल मीडिया के विकृत ट्रेंड्स ने इसे विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस अजीबोगरीब ट्रेंड की शुरुआत तब हुई जब एक चीनी वीडियो ब्लॉगर ने मजाक में इस खिलौने को अपनी बेटी की तरह मानते हुए उसका नाम ‘नताशा’ रख दिया था। बाद में एक हादसे में वह खिलौना हाथ से गिरकर बुरी तरह विकृत हो गया और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद व्यूज बटोरने की होड़ में बड़ी संख्या में लोगों ने इस डॉल पर अत्याचार करने वाले वीडियो बनाना शुरू कर दिया, जो समय के साथ बेहद हिंसक और आपत्तिजनक रूप लेने लगा।

आलोचकों का कहना है कि यह विवाद केवल गुड़िया की दुर्दशा तक सीमित नहीं है, बल्कि वीडियो में इस्तेमाल किए जा रहे कैप्शन और टिप्पणियां भी नस्लीय रूढ़ियों को बढ़ावा देती हैं। हांगकांग और अन्य वैश्विक क्षेत्रों में रहने वाले अश्वेत समुदाय के लोगों ने इसे बेहद अपमानजनक और संवेदनहीन बताया है। विशेषज्ञों ने भी सख्त चेतावनी दी है कि ऐसे दृश्य बच्चों के कोमल मानसिक विकास पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं और उनके मन में समाज के प्रति गलत धारणा विकसित कर सकते हैं। विवाद बढ़ता देख अब चीन के उपभोक्ता संगठनों और बाजार नियामक संस्थाओं ने मामले का कड़ा संज्ञान लिया है और कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से इन विवादित वीडियो को तेजी से हटाया जा रहा है।

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