रांची : अखिल भारतीय साहित्य परिषद की रांची जिला इकाई के तत्वावधान में रविवार को विद्यापति भवन में “आत्मबोध से विश्वबोध” विषय पर वैचारिक संगोष्ठी सह काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और कवियों ने भारतीय साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रचेतना से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता रांची जिला अध्यक्ष डॉ. राजश्री जयंती ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि आत्मबोध व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास का मूल आधार है तथा भारतीय साहित्य मानवता, संस्कृति और राष्ट्रचेतना का सशक्त संवाहक है।
साहित्य और भारतीय चिंतन पर वक्ताओं ने रखे विचार
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार सिंह ने भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता प्रदेश महामंत्री डॉ. विजय प्रकाश ने आत्मबोध को विश्वकल्याण का आधार बताते हुए भारतीय चिंतन की वैश्विक उपयोगिता पर अपने विचार व्यक्त किए। विशिष्ट अतिथि प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. प्रशांत करण तथा सम्मानित अतिथि प्रदेश मंत्री इंद्रजीत यादव और चंदन प्रजापति ने भी साहित्य की सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भूमिका पर अपने विचार रखे।
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काव्य गोष्ठी में कवियों ने सुनाईं रचनाएं
संगोष्ठी के बाद आयोजित काव्य गोष्ठी में डॉ. सुरेंद्र कौर नीलम, रेनू जा रेणुका, डॉ. ममता मनीष सिन्हा, असीत कुमार, रेणु बाला धार, ऋतुराज वर्षा, रूणा रश्मि ‘दीप्त’, स्मिता, संगीता वर्मा, विभा वर्मा, डॉ. अजय नन्दन, अनिरुद्ध साहू, निर्मला कर्ण, करुणा सिंह कल्पना, प्रेम लता, सुधा कर्ण, उमा सिंहा, सदानंद सिंह यादव, स्मिता पी और शालिनी नायक सहित अनेक कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम में डॉ. ममता मनीष सिन्हा की ओजस्वी और भावपूर्ण प्रस्तुति को श्रोताओं ने विशेष सराहना दी।
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कार्यक्रम का संचालन इंद्रजीत यादव ने किया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज में संस्कार, संवेदना और राष्ट्रीय चेतना के संवर्धन का प्रभावी माध्यम है। अंत में उन्होंने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, मीडिया प्रतिनिधियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।




