जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित डीडी बार में हुए हिमांशु सिंह हत्याकांड और प्रत्युष आनंद को गंभीर रूप से घायल किए जाने के मामले में पुलिस जांच तेज हो गई है। इस मामले के मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा और डीडी बार के संचालक सह भाजपा नेता नीरज सिंह से पुलिस रिमांड पर लगातार पूछताछ कर रही है। अदालत ने दोनों आरोपियों को 13 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस मामले में वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
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सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने पहले दोनों आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की और बाद में बयानों में सामने आए विरोधाभास को स्पष्ट करने के लिए आमने-सामने बैठाकर भी सवाल-जवाब किए। इसी क्रम में मामले के एक अन्य अहम किरदार राहुल दुबे को हिरासत में लेकर रातभर पूछताछ की गई और उसका विस्तृत बयान दर्ज किया गया। सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी राहुल दुबे को सरकारी गवाह बनाने की संभावना पर भी विचार कर रही है।
राहुल दुबे के बयान में सामने आए अहम तथ्य
सूत्रों के मुताबिक, राहुल दुबे ने अपने बयान में बताया कि उसके और बार संचालक नीरज सिंह के बीच पुराने संबंध रहे हैं, जबकि मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा भी उसका पुराना परिचित है। बयान के अनुसार, घटना वाले दिन डीडी बार के भीतर हिमांशु सिंह और उसके साथियों के साथ विवाद होने पर राहुल दुबे ने नीरज सिंह को फोन किया। बताया गया कि फोन नीरज सिंह के बेटे ने उठाया। राहुल के अनुसार, बातचीत के दौरान कहा गया कि हिमांशु सिंह और उसके साथी रोज बार में आकर हंगामा करते हैं और अब “कुछ तो करना होगा”। इसके बाद, बयान के मुताबिक, बार के भीतर मौजूद लोगों ने अपने अन्य साथियों को मौके पर बुलाया। जैसे ही हिमांशु सिंह बार से बाहर निकला, उस पर हमला कर दिया गया।
पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच में जुटी
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि हमले के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर हिमांशु सिंह को पुलिस की जीप से बाहर खींचकर मारपीट की और चापड़ से हमला किया। इस हमले में हिमांशु सिंह की मौके पर मौत हो गई, जबकि प्रत्युष आनंद गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका इलाज जारी है। पुलिस अब आरोपियों और गवाहों के बयानों के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान कर रही है। जांच एजेंसी का उद्देश्य एक मजबूत चार्जशीट तैयार करना है ताकि अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। 13 जुलाई तक की रिमांड अवधि के दौरान पुलिस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच करेगी।




