पूर्वी सिंहभूम : टाटा स्टील में वर्ष 1981 से 1990 के दौरान आपातकालीन अवधि में कार्य करने वाले स्थायीकरण से वंचित आश्रित मजदूरों की समस्याओं को लेकर मंगलवार को झारखंड स्टील ठेका मजदूर संघ ने डीसी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को मांगपत्र सौंपकर वर्षों से लंबित मामलों के शीघ्र समाधान की मांग की।
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संघ के नेताओं का कहना है कि प्रभावित मजदूर पिछले 36 वर्षों से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है। उन्होंने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई करने की मांग की।
स्थायीकरण और लंबित वेतन का उठाया मुद्दा
संघ के नेता फनी भूषण महतो ने बताया कि आपातकालीन दौर में आदिवासी, मूलवासी और स्थानीय मजदूरों ने टाटा स्टील का उत्पादन प्रभावित नहीं होने दिया और कठिन परिस्थितियों में लगातार काम किया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रमिकों को स्थायी नौकरी नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मजदूरों को बिना किसी पूर्व सूचना के कार्य से हटा दिया गया। साथ ही अक्टूबर 1990 तक का वेतन भी आज तक भुगतान नहीं किया गया है।
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मुआवजा, रोजगार और प्रशिक्षण की मांग
ज्ञापन में संघ ने मांग की है कि स्थायीकरण से वंचित कर्मचारियों और उनके आश्रितों को सम्मानजनक मुआवजा पैकेज दिया जाए। वर्ष 1990 से लंबित डीए और बेसिक वेतन का भुगतान किया जाए तथा उनके पुत्र-पुत्रियों को कौशल प्रशिक्षण देकर स्थानीय उद्योगों में रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
संघ ने बताया कि टाटा स्टील के जनरल ऑफिस गेट के सामने वर्षों से नियमित बैठकें और शांतिपूर्ण धरना आयोजित किए जाते रहे हैं। प्रबंधन के आग्रह पर तीन बार प्रभावित मजदूरों की सूची और आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए गए तथा कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
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संघ ने चेतावनी दी कि यदि लंबे समय से लंबित मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रबंधन और प्रशासन की होगी।




