केन्द्रीय धुमकुड़िया भवन करम टोली, रांची में आदिवासी अधिकार संरक्षण समिति ( सामाजिक संगठन) की बैठक हुई।

केन्द्रीय धुमकुड़िया भवन करम टोली, रांची में आदिवासी अधिकार संरक्षण समिति ( सामाजिक संगठन) की बैठक हुई। बैठक का मुख्य विषय था:- एक उलगुलान जमीन दलालों के खिलाफ बैठक में कई आदिवासी सामाजिक अगुवा एवं अपने जमीन को बचाने के लिए संघर्षरत सैंकड़ों युवा एवं

केन्द्रीय धुमकुड़िया भवन करम टोली, रांची में आदिवासी अधिकार संरक्षण समिति ( सामाजिक संगठन) की बैठक हुई।

बैठक का मुख्य विषय था:- एक उलगुलान जमीन दलालों के खिलाफ


बैठक में कई आदिवासी सामाजिक अगुवा एवं अपने जमीन को बचाने के लिए संघर्षरत सैंकड़ों युवा एवं महिलाएं शामिल हुई।
बैठक की अध्यक्षता सामाजिक अगुवा सुरेश उरांव जी ने किया।
अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्षरत महिला एवं युवाओं ने अपनी अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि हम सभी लोग जब तक एक जुट होकर नहीं लड़ेंगे, तब तक हमारी जमीनें लुटती रहेंगी।

आदिवासी अधिकार संरक्षण समिति की केन्द्रीय महासचिव कुन्दरसी मुंडा ने कहा कि, झारखंड में आदिवासियों की जमीन पर सबसे ज्यादा नजर जमीन दलालों की गड़ी हुई है। जमीन दलालों व भू-माफियाओं से अगर लड़ना है और उन्हें बेबस करना है तो सभी लोगों को एकजुट होकर विरोध करना होगा। जिस दिन एक जुट हो गए उस दिन उनकी खैर नहीं। जमीन दलालों का कोई जात नहीं होता है, जमीन दलाल और माफिया गैर-आदिवासी भी हो सकते हैं और अपने आदिवासी भी हो सकते हैं, हमें दोनों से लड़ना होगा। अपने आदिवासी समाज के लोग भी यदि गलती कर रहे हैं तो उन्हें माफ नहीं करना है।

केन्द्रीय महासचिव कुन्दरसी मुंडा जी ने उलगुलान का आगाज करते हुए, संगठन का विस्तार किया, जिसमें कई आदिवासी लड़ाकु अगुवा जो दिन रात जल जंगल जमीन और आदिवासी मुद्दे पर प्रखर होकर लड़ते हैं, सभी ने सदस्यता ग्रहण की। सदस्यता लेने के बाद सभी लोगों को महत्वपूर्ण पद भी दिए गए।
कुमुदिनी प्रभावती केरकेट्टा जी एवं राजेश लिंडा जी को केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद व जिम्मेदारी दिया गया।
हर्षिता मुंडा जी को रांची जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई
जिला महासचिव बसंत लकड़ा (मांडर) जी को बनाया गया।
आशीष मुंडा (कोकर) जी को रांची महानगर अध्यक्ष का जिम्मेदारी सौंपा गया।
उसी तरह रातु, मांडर, नामकुम प्रखंड कमिटी का भी गठन कर नई जिम्मेदारी सौंपी गई, ताकि चारों ओर जमीन बचाने का उलगुलान शुरू किया जाए।
नवनिर्वाचित केन्द्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कुमुदिनी प्रभावती एवं राजेश लिंडा ने संयुक्त रूप से कहा कि अब जमीन दलालों की खैर नहीं।
आदिवासी अस्तित्व को बचाने के लिए हमलोग पहले से ही संघर्ष करते आ रहे थे, मगर अकेले -अकेले। लेकिन अब संगठित होकर होकर लड़ेंगे। लोग हमें धर्म के नाम पर सरना, ईसाई, हिन्दू बोलकर लड़ाने का प्रयास करते हैं और हमारी एकजूटता को तोड़ने की कोशिश करते हैं, वैसे लोगों को भी हम मुंहतोड़ जवाब देंगे।
जिला अध्यक्ष हर्षिता मुंडा और महासचिव बसंत लकड़ा ने संयुक्त रूप से कहा कि हमारी संस्कृति, पहचान और अस्तित्व जमीन से है। हमारी सामाजिक धार्मिक व पारंपरिक व्यवस्था की जमीनें और सरना,मसना, हड़गड़ी , भूईंहरी पहनाई जमीनों को भी जमीन माफिया नहीं छोड़ रहे हैं। हमलोग मिलकर उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने का काम करेंगे। हमें हमारी पुरखों की व्यवस्था को बचाना बहुत जरूरी है।
युवा अगुवा लक्ष्मी मुंडा और चन्द्र दीप उरांव को मिडीया प्रभारी का जिम्मा सौंपा गया।

बैठक में मुख्य रूप से सुरेश उरांव, सुमेश उरांव, गुलाबो मुंडा, डोली कच्छप, विकास उरांव, चन्द्र दीप उरांव, सरस्वती मुंडा, मानती देवी, कार्तिक मुंडा, लाला महली, कृष्णा उरांव, राजेश लकड़ा, राजेश कच्छप, शम्भू केरकेट्टा एवं सैकड़ों युवा और महिलाएं शामिल हुई।
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