नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के मौके पर 7 और 8 नवंबर को ग्रीन पटाखे फोड़ने की इजाजत दे दी है। लोग सुबह 6 से 7 बजे तक और रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़ सकेंगे। कोर्ट ने यह छूट अपने 15 अक्टूबर 2025 के आदेश के हिसाब से दी है। यानी पटाखे फोड़ने का शौक पूरा करना है, तो तय समय का ध्यान रखना पड़ेगा। कोर्ट ने अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों तथा अधिसूचित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे फोड़ने पर रोक लगाई है। इन जगहों के साथ शैक्षणिक संस्थानों को भी ‘नो-क्रैकर जोन’ घोषित किया जाएगा। इन क्षेत्रों को उचित तरीके से चिह्नित करने और लोगों को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
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बेरियम वाले पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वैध प्रमाणपत्र रखने वाले पटाखा और आतिशबाजी निर्माता केवल ग्रीन पटाखों का ही निर्माण कर सकेंगे। बेरियम वाले पटाखों और सीएसआईआर-एनईईआरआई से ग्रीन पटाखों के रूप में मंजूरी नहीं पाने वाले पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी। कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों से अवैध और पारंपरिक पटाखों की आपूर्ति रोकने के लिए कदम उठाने को भी कहा है। पटाखे जलने से हवा में बड़ी मात्रा में कणीय पदार्थ (पीएम) निकलते हैं। इनमें पीएम 10 और पीएम 2.5 शामिल हैं। ये ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण होते हैं, जो इतने छोटे हो सकते हैं कि नाक और फेफड़ों तक पहुंच जाएं। कुछ कण फेफड़ों से रक्त में मिलकर शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच सकते हैं। पीएम 2.5 को विशेष रूप से नुकसानदायक माना जाता है। ये सूक्ष्म कण हवा में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। आतिशबाजी कुछ घंटों या दिनों तक होने के बावजूद इसके कणों का असर हवा में लंबे समय तक रह सकता है।
बेरियम और दूसरे रसायनों से नुकसान
पटाखों में बेरियम लवण का इस्तेमाल चमकीली हरी लौ पैदा करने और पाउडर को तेजी से जलाने के लिए किया जाता है। बेरियम जलने से जहरीले कण हवा में फैल सकते हैं, जो फेफड़ों और दिल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बेरियम वाले पटाखों को निगलने से खून में पोटैशियम का स्तर तेजी से गिर सकता है। इस स्थिति को हाइपोकैलेमिया कहते हैं। इससे मांसपेशियों में कमजोरी, दिल की धड़कन की लय बिगड़ने और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
पटाखों में रंग और आवाज पैदा करने के लिए कई तरह के रसायनों और धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है। इनके जलने से जहरीली गैसों के अवशेष भी निकल सकते हैं। दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता गिरने और सांस संबंधी बीमारियों तथा गर्भावस्था से जुड़ी परेशानियों के मामले बढ़ने की बात सामने आती है। इसी वजह से कोर्ट ने केवल ग्रीन पटाखों की अनुमति दी है। इनमें ऐसे उत्पाद शामिल हैं, जिनमें बेरियम, लिथियम, आर्सेनिक, एंटीमनी, सीसा और पारा नहीं होता।



