नई दिल्ली : दीपावली से पहले मनाया जाने वाला धनतेरस धन, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना से जुड़ा पर्व है। इस दिन लोग सोना-चांदी, बर्तन और घरेलू सामान खरीदते हैं। वहीं, कई परिवारों में धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। झाड़ू जैसी सामान्य घरेलू वस्तु को इस दिन शुभ क्यों माना जाता है, इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं और लोक परंपराएं जुड़ी हैं।
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धनतेरस पर झाड़ू खरीदना क्यों माना जाता है शुभ?
हिंदू धर्म में स्वच्छता को शुभता और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। त्योहारों और मांगलिक अवसरों पर घर की साफ-सफाई करने की परंपरा भी इसी विचार से जुड़ी है। झाड़ू घर से धूल-मिट्टी और गंदगी हटाती है। प्रतीकात्मक रूप से इसे नकारात्मकता और दरिद्रता दूर करने से भी जोड़ा जाता है। इसी मान्यता के चलते कई लोग धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदकर घर लाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में माता लक्ष्मी को धन, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। दीपावली पर उनके स्वागत के लिए घरों की साफ-सफाई की जाती है और मुख्य द्वार सजाया जाता है। इसी परंपरा के कारण झाड़ू को भी स्वच्छता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि घर को साफ रखने से शुभ वातावरण बनता है और परिवार में सकारात्मकता बनी रहती है।
धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने की परंपरा कैसे जुड़ी?
धनतेरस को खरीदारी के लिए शुभ अवसर माना जाता है। इस दिन लोग ऐसी वस्तुएं खरीदते हैं, जिनका इस्तेमाल घर में लंबे समय तक किया जा सके। झाड़ू रोजमर्रा की जरूरत है और इसे घर की स्वच्छता, व्यवस्था तथा समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस पर झाड़ू से जुड़ी कई लोक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि इस दिन नई झाड़ू खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है। वहीं, कुछ परिवार झाड़ू को संभालकर रखने और स्वच्छ स्थान पर रखने पर विशेष ध्यान देते हैं। कई जगहों पर झाड़ू को घर की अव्यवस्था दूर कर साफ-सुथरा वातावरण बनाने वाली वस्तु के रूप में देखा जाता है। इसलिए धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा केवल घरेलू जरूरत तक सीमित नहीं है। इसके साथ स्वच्छता, सुव्यवस्था और घर को शुभ अवसर के लिए तैयार करने का भाव भी जुड़ा है।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी प्रचलित धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है।



