रांची : जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में शनिवार को हुई गोलीबारी की घटना के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। घटना में चार लोग घायल हुए थे और पुलिस के अनुसार आरोपियों ने 11 राउंड फायरिंग की थी। मामले की जांच के लिए एसपी सिटी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई है।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उन्होंने अपने स्तर से घटना की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने दावा किया कि लोगों से बातचीत में सामने आई बातें चिंताजनक हैं। मरांडी ने कहा कि पहले जिस तरह की घटनाओं की खबर धनबाद से आती थी, वैसी दहशत अब राज्य के दूसरे शहरों तक भी पहुंच रही है।
पुलिस नेतृत्व और पदस्थापन को लेकर सवाल
मरांडी ने पुलिस के शीर्ष पद पर नियुक्तियों और अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस नेतृत्व में योग्यता और नियमों के बजाय राजनीतिक वफादारी को महत्व दिया जा रहा है।
उन्होंने नीरज सिन्हा के कार्यकाल के बाद डीजीपी पद पर रिटायर्ड अधिकारियों की नियुक्ति का जिक्र करते हुए इसे पुलिस की निष्पक्षता और जवाबदेही के लिए नुकसानदायक बताया। उन्होंने अनुराग गुप्ता और मौजूदा डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए। झारखंड पुलिस की 2026 की आधिकारिक सिविल लिस्ट में तदाशा मिश्रा को डीजीपी के पद पर दर्ज किया गया है।
मरांडी ने कहा कि जब पुलिस नेतृत्व में मेरिट के बजाय राजनीतिक पसंद और वफादारी को आधार बनाया जाएगा, तो इसका असर कानून व्यवस्था पर दिखाई देगा।
अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देने पर भी सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने एडीजी स्तर के अधिकारी मनोज कौशिक के पास रांची जोनल आईजी का प्रभार होने और रांची में डीआईजी का पद खाली रखने को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जवाब मांगा। उन्होंने मयूर पटेल को पुलिस मुख्यालय में प्रोविजन और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी के साथ दुमका आईजी का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का भी प्रशासनिक औचित्य पूछते हुए सवाल उठाया।
उन्होंने पंकज कंबोज और नरेंद्र कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारियों के बीच अतिरिक्त प्रभार बांटे जाने का आधार सार्वजनिक करने की मांग की। झारखंड पुलिस की आधिकारिक संपर्क सूची में मनोज कौशिक को एडीजी मुख्यालय के रूप में दर्ज किया गया है।
मरांडी ने मयूर पटेल और संजीव कुमार के पुराने पदस्थापन के दौरान कोयला तस्करी और अवैध कमाई से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं कराई गई और अब तक क्या कार्रवाई हुई।
CID और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
बाबूलाल मरांडी ने CID में पदस्थ अजय लिंडा और असीम विक्रांत मिंज जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की क्षमता के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने JPSC-JSSC और CID की बड़ी जांचों में अधिकारियों की नियुक्ति और कार्य-विभाजन को सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने राकेश बंसल के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद लंबे समय तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहने का मुद्दा भी उठाया। साथ ही CBI में लंबे अनुभव वाले माइकल राज जैसे अधिकारियों के पुलिस, CID और ACB की महत्वपूर्ण जांचों में इस्तेमाल को लेकर सरकार से जानकारी मांगी।
अपराध पर कार्रवाई और जवाबदेही की मांग
मरांडी ने आरोप लगाया कि पुलिस तंत्र में चोरी, तस्करी, अपराधियों को संरक्षण, बालू-कोयला-पत्थर के अवैध कारोबार और जमीन कब्जे से जुड़ी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जनता का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित होता है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए मरांडी ने कहा कि गोलीबारी के बाद अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अपराधियों की गिरफ्तारी, उन्हें संरक्षण देने वालों की भूमिका की जांच और पुलिस पदस्थापन में योग्यता, ईमानदारी और जवाबदेही को प्राथमिकता देने की मांग की।
मरांडी ने कहा कि झारखंड की पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने सरकार से पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।




