रांची : झारखंड के सरकारी प्लस टू उच्च विद्यालयों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। झारखंड व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ के बैनर तले प्रशिक्षक झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) के समक्ष अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक परिषद उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेकर समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाती, तब तक धरना जारी रहेगा। प्रशिक्षक बकाया मानदेय के भुगतान, मानदेय में वृद्धि, नौकरी की सुरक्षा और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
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सात साल से मानदेय नहीं बढ़ने का दावा
संघ के अनुसार, राज्य के विभिन्न सरकारी प्लस टू उच्च विद्यालयों में आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षक विद्यार्थियों को अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण देते हैं। इसके बावजूद उन्हें समय पर मानदेय भुगतान और अन्य सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने आउटसोर्सिंग कंपनियों के पास लंबित मानदेय का भुगतान 24 घंटे के भीतर कराने की मांग की है। प्रशिक्षकों का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
मानदेय में वृद्धि भी प्रशिक्षकों की प्रमुख मांगों में शामिल है। संघ का दावा है कि पिछले सात वर्षों से उनके मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। संघ ने पीएबी 2024-25 और 2025-26 में व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए निर्धारित 24 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय का हवाला देते हुए इसे अप्रैल 2025 से लागू करने की मांग की है। प्रशिक्षक बढ़े हुए मानदेय का भुगतान बकाया एरियर के साथ चाहते हैं। इसके अलावा शिक्षा विभाग से आउटसोर्सिंग कंपनियों को हर महीने की एक से पांच तारीख के बीच मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
ईएसआईसी कार्ड और वेतन पर्ची की मांग
संघ ने राज्यभर में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों के मानदेय से होने वाली कटौती में एकरूपता लाने की मांग की है। इसमें ईएसआईसी और पीएफ जैसी मदों में समान नियम लागू करने तथा हर महीने वेतन पर्ची उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। इसके साथ ही सभी प्रशिक्षकों को ईएसआईसी कार्ड देने की मांग उठाई गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे स्वयं और अपने परिवार के सदस्यों का इलाज करा सकें। संघ का कहना है कि प्रशिक्षकों को मानदेय के साथ सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जरूरी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
स्कूलों में किताबें, स्टेशनरी और लैब की सुविधा मांगी
व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए विद्यालयों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। संघ चाहता है कि प्रत्येक शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अप्रैल से मई के बीच विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें, कच्चा माल और स्टेशनरी उपलब्ध करा दी जाए। इसके अलावा विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए औद्योगिक भ्रमण और अतिथि व्याख्याताओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। संघ ने पुराने विद्यालयों की प्रयोगशालाओं का हर साल रखरखाव कराने और नए विद्यालयों में संबंधित ट्रेड के अनुसार अलग-अलग प्रयोगशालाएं स्थापित करने की मांग भी रखी है। संघ ने यह भी कहा है कि झारखंड में व्यावसायिक शिक्षा से जुड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियों के कार्यालय रांची में होने चाहिए, ताकि विभागीय समन्वय बेहतर हो सके और प्रशिक्षकों की समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सके।
60 वर्ष तक नौकरी की सुरक्षा की मांग
व्यावसायिक प्रशिक्षकों की प्रमुख मांगों में 60 वर्ष की आयु तक नौकरी की सुरक्षा देना और उन्हें झारखंड मैनपावर प्रोक्योरमेंट (आउटसोर्सिंग) 2025 में शामिल करना भी शामिल है। संघ का कहना है कि मानदेय और नौकरी की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता के बीच काम करना प्रशिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसी कारण उन्होंने मांगों के समाधान के लिए अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।
संघ ने साफ किया है कि केवल आश्वासन मिलने से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। जब तक जेईपीसी उनकी मांगों पर निर्णय लेकर समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक धरना जारी रहेगा। अब परिषद और संबंधित विभाग की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर आंदोलन की आगे की स्थिति निर्भर करेगी।




