रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने गुजरात में कथित तौर पर सक्रिय गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बुधवार को हरमू स्थित JMM पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि गुजरात में ऐसी कई राजनीतिक पार्टियां हैं, जिन्हें चुनाव लड़े बिना ही करोड़ों रुपये का चंदा मिला है। उन्होंने इस पूरे मामले में चुनाव आयोग के साथ-साथ ED, CBI और आयकर विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।
विनोद पांडेय ने कहा कि देश में 2800 से अधिक राजनीतिक पार्टियां पंजीकृत हैं। इनमें राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के अलावा कई गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियां भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात में कुछ ऐसी पार्टियां सक्रिय हैं, जो कागजों पर तो राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी राजनीतिक गतिविधियां नजर नहीं आतीं।
उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि गुजरात में ऐसी करीब 10 पार्टियां हैं, जिनमें से छह के कार्यालय अहमदाबाद में बताए जाते हैं। पांडेय के अनुसार, कुछ पार्टियों के कार्यालय बंद दुकानों या फ्लैट के बंद कमरों में बताए गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ दलों के पास सक्रिय अध्यक्ष, खजांची या नियमित राजनीतिक गतिविधियां तक नहीं हैं और कई ने अब तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है।
खातों में करोड़ों की रकम का दावा
विनोद पांडेय ने दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में ऐसी कुछ पार्टियों के बैंक खातों में भारी रकम जमा हुई। उनके मुताबिक, किसी पार्टी के खाते में करीब 1000 करोड़ रुपये, किसी में 620 करोड़ रुपये और किसी अन्य के खाते में करीब 950 करोड़ रुपये तक की रकम होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने दावा किया कि सबसे कम रकम वाली पार्टी के खाते में भी करीब 138 करोड़ रुपये थे।
उन्होंने लोकशाही सत्ता पार्टी का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में पार्टी को करीब 1045 करोड़ रुपये का चंदा मिला और लगभग 950 करोड़ रुपये के खर्च का विवरण चुनाव आयोग और आयकर विभाग के समक्ष दिया गया।
पांडेय ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम का स्रोत क्या है और इन राजनीतिक दलों को चंदा देने वाले लोग या संस्थाएं कौन हैं।
चुनाव आयोग और जांच एजेंसियों से कार्रवाई की मांग
JMM नेता ने सवाल किया कि यदि इन पार्टियों के खातों में इतनी बड़ी रकम का लेन-देन हुआ है तो चुनाव आयोग, ED, CBI और आयकर विभाग की ओर से इसकी जांच क्यों नहीं की गई।
उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह रकम मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी तो नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसी रकम का इस्तेमाल राजनीतिक खरीद-फरोख्त में किया जा सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विनोद पांडेय ने कहा कि इन पार्टियों को चंदा देने वालों की पहचान सार्वजनिक होनी चाहिए और पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो इस मुद्दे को लेकर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जा सकता है।
बिहार और बंगाल की राजनीतिक पार्टियों का भी किया जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विनोद पांडेय ने एक ऐसी राजनीतिक पार्टी का भी जिक्र किया, जिसका कार्यालय पहले बिहार में होने का दावा किया गया। उनके अनुसार, पार्टी की तत्कालीन अध्यक्ष के भाजपा में शामिल होने और पार्टी में महत्वपूर्ण पद मिलने के बाद संबंधित राजनीतिक संगठन का कार्यालय गुजरात स्थानांतरित हो गया।
उन्होंने बंगाल की एनसीपीआई नामक पार्टी का भी उल्लेख किया और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर सवाल उठाए। हालांकि, उनके इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विनोद पांडेय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पार्टी की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखी गई है।
उन्होंने जिला प्रशासन, DC और BLO से अपील की कि मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया को आम लोगों के लिए सरल बनाया जाए, ताकि पात्र मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम जाति या धर्म के आधार पर मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। वहीं, जो लोग पात्र नहीं हैं, उनके नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए।
बांग्लादेशी और फर्जी मतदाताओं के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना
मतदाता सूची में कथित तौर पर फर्जी मुस्लिम और बांग्लादेशी नागरिकों के नाम जोड़े जाने के आरोपों को लेकर भी विनोद पांडेय ने भाजपा पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय कुछ राजनीतिक दलों को बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे मुद्दे याद आने लगते हैं। उन्होंने बंगाल और बिहार के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावी राजनीति में ऐसे मुद्दों को बार-बार उठाया जाता है।
पांडेय ने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को चीन की गतिविधियों से उतनी परेशानी नहीं होती, जितनी बांग्लादेश और पाकिस्तान के मुद्दों से होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है।






