रांची। झारखंड में एक तरफ कार्मिक विभाग ने धनबाद नगर निगम के तत्कालीन उप नगर आयुक्त अनिल यादव को 2.65 करोड़ के भुगतान मामले में तकनीकी आधार पर सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
वहीं दूसरी ओर, झारखंड हाई कोर्ट ने शेल कंपनियों के जरिए 730 करोड़ रुपये के बड़े जीएसटी घोटाले के आरोपी व्यवसायी विक्की भलोटिया की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
जीएसटी घोटाले के आरोपित विक्की भलोटिया की जमानत पर निर्णय सुरक्षित
हाई कोर्ट ने 730 करोड़ रुपये के कथित जीएसटी घोटाला एवं मनी लांड्रिंग मामले के आरोपित कारोबारी विक्की भलोटिया उर्फ अमित अग्रवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
यह मामला शेल कंपनियों के माध्यम से फर्जी जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आई-टीसी) का लाभ उठाकर 730 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले से जुड़ा है। इस मामले में ईडी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच के दौरान जीएसटी घोटाले में कई आरोपितों की गिरफ्तारी हुई थी।
इनमें जमशेदपुर के कारोबारी विक्की भालोटिया, शिव कुमार देवड़ा, मोहित देवड़ा, कोलकाता के कारोबारी अमित गुप्ता सहित अन्य आरोपित शामिल हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, शिव कुमार देवड़ा, सुमित गुप्ता, अमित गुप्ता सहित अन्य आरोपितों पर करीब 14,325 करोड़ रुपये के फर्जी जीएसटी चालान तैयार करने का आरोप है।
इन फर्जी बिलों के आधार पर 730 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का दावा किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।
अनिल यादव 2.65 करोड़ रुपये जल्दबाजी में भुगतान करने का था आरोप
धनबाद नगर निगम के तत्कालीन उप नगर आयुक्त अनिल कुमार यादव को उनके ऊपर लगे तमाम आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। इस संदर्भ कार्मिक विभाग ने गुरुवार को संकल्प जारी कर दिया है। यादव पर आरोप था कि उन्होंने उप नगर आयुक्त रहते हुए मेसर्स व्बोन टेक्नाेलाजी द्वारा आपूर्ति की गई सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा का सत्यापन किए बगैर भुगतान करने की अनुमति प्रदान कर दी।
इस क्रम में 2.65 करोड़ रुपये के भुगतान पर आपत्ति जताते हुए तत्कालीन मेयर ने कार्रवाई के लिए फाइल आगे बढ़ा दी। इसके बाद 2019 में यादव के खिलाफ आरोप गठित हुआ और 2021 में विभागीय कार्यवाही शुरू की गई।
2022 में पहली जांच रिपोर्ट में तकनीकी आधार पर कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं हुआ। मामला चलता और 2026 में एक बार फिर जांच के आदेश दिए गए। इसके बाद आरोप पत्र एवं साक्ष्यों के आधार पर विभागीय कार्यवाही संचालित करने को लेकर कोई प्रमाण नहीं मिला।
महापौर को यह भी शिकायत थी कि संचिका पर पृच्छा के बावजूद किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। विभागीय जांच के क्रम में जांच पदाधिकारी समर्पित स्पष्टीकरण से संतुष्ट नजर आए और उन्होंने यादव को आरोप मुक्त करने की अनुशंसा कर दी।




