हजारीबाग ओपन जेल में हुई अनोखी शादी, दूल्हा बने पूर्व नक्सली कमांडर सुरेश सिंह मुंडा

रांची : नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की दिशा में कदम बढ़ा चुके पूर्व नक्सली कमांडर सुरेश सिंह मुंडा ने शादी कर ली है। हजारीबाग ओपन जेल में बंद सुरेश सिंह मुंडा ने तमाड़ क्षेत्र के अराहंगा गांव की रहने वाली

सुरेश सिंह मुंडा
सुरेश मुंडा ने सोमवारी से की शादी

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रांची : नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की दिशा में कदम बढ़ा चुके पूर्व नक्सली कमांडर सुरेश सिंह मुंडा ने शादी कर ली है। हजारीबाग ओपन जेल में बंद सुरेश सिंह मुंडा ने तमाड़ क्षेत्र के अराहंगा गांव की रहने वाली सोमवारी हेमरम के साथ विवाह किया। पुलिस और जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित इस शादी में अधिकारी भी बाराती बने और नवदंपती को नई जिंदगी की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।

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बुंडू के सुरेश और तमाड़ की सोमवारी ने की शादी

जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने बताया कि सुरेश सिंह मुंडा रांची जिले के बुंडू थाना क्षेत्र के बारूहातू गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने तमाड़ क्षेत्र के अराहंगा गांव की निवासी सोमवारी हेमरम के साथ विवाह किया है। सुरेश सिंह मुंडा हजारीबाग ओपन जेल में बंद हैं। उनके विवाह के लिए पुलिस और जिला प्रशासन ने आवश्यक पहल की। हजारीबाग के जिला विवाह पदाधिकारी राजेश एक्का ने विवाह का पंजीकरण कराया। इस मौके पर हजारीबाग पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बाराती की भूमिका निभाई और नवदंपती को वैवाहिक जीवन की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।

डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर हुई पहल

इस विवाह को संपन्न कराने में पुलिस और जिला प्रशासन की अहम भूमिका रही। डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर इस संबंध में निर्णय लिया गया। पहल का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके पुनर्वास को प्रोत्साहित करना है। पुलिस का मानना है कि नक्सलवाद छोड़ने वाले लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। रोजगार, पारिवारिक जीवन और सामाजिक स्वीकार्यता जैसे पहलू उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में मदद कर सकते हैं।

पुनर्वास को लेकर क्या है संदेश?

सुरेश सिंह मुंडा और सोमवारी हेमरम का विवाह आत्मसमर्पण के बाद सामान्य जीवन में लौटने की संभावनाओं को सामने रखता है। पुलिस और प्रशासन की इस पहल के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को नई जिंदगी शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

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